27 समितियों की बैठक में कुलपति ने पांच सदस्यों की समिति गठित कर दी जिम्मेदारी
बरेली। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह एक ही दिन होने के चलते आयोजन को लेकर चल रहा असमंजस अब खत्म हो गया है। जारी गाइडलाइन के मुताबिक, निर्धारित तादाद में ही लोगों को कार्यक्रम में आमंत्रित करने और शेष को ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभाग कराया जाएगा। व्यवस्था के लिए कुलपति ने पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी है।
महात्मा ज्योतिबाफुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय के समिति कक्ष में कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह की अध्यक्षता में 15 अप्रैल को प्रस्तावित दीक्षांत समारोह के आयोजन के संबंध में मंगलवार को बैठक हुई। इसमें पूर्व में गठित 27 समितियों के अध्यक्ष शामिल रहे। निर्णय लिया गया कि कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत दीक्षांत समारोह को ऑनलाइन/ऑफलाइन मोड पर कराया जाएगा। एमबीए विभाग के कांफ्रेंस रूम/सिंडिकेट हॉल में कार्यक्रम होगा। उद्घाटन और शिलान्यास के कार्यक्रम कोविड प्रोटोकॉल के तहत कराए जाएंगे। किसी स्थान पर भीड़ ना हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि दीक्षांत समारोह के लिए विश्वविद्यालय में दो द्वार बनाने पर सहमति बनी।
ऑनलाइन काम जैसे यूनिवर्सिटी वेबसाइट पर अपलोड करना, वेबहोस्टिंग, यूट्यूब स्ट्रीमिंग, फेसबुक लाइव आदि के संचालन के लिए पांच सदस्यों की समिति गठित की गई है। ये काम डॉ. अमित सिंह, प्रोफेसर विनय ऋषिवाल, प्रोफेसर एसएस बेदी, प्रोफेसर आलोक श्रीवास्तव और प्रोग्रामर रविंद्र गौतम के नेतृत्व में होंगे। बैठक में कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडे, परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह, प्रोफेसर संजय मिश्रा, प्रोफेसर संजय गर्ग, प्रोफेसर केके चौधरी, प्रोफेसर जेएन मौर्य, प्रोफेसर संतोष अरोरा, प्रोफेसर आशा चौबे, तपन वर्मा उपस्थित रहे।
राज्यपाल के आने पर संशय बरकरार
कोविड के मामले जिले में तेजी से बढ़ रहे हैं। इसे देखते हुए दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के शामिल होने को लेकर संशय की स्थिति है। बताया जाता है कि राजभवन से पूर्व में कॉल कर जिले में कोविड की स्थिति और तैयारियों आदि पर जानकारी मांगी गई। कुलपति ने भी राजभवन और शासन को पत्र लिखकर एक ही दिन चुनाव और समारोह होने की जानकारी दी है। उधर, प्रशासन ने विश्वविद्यालय के तमाम कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगा दी है। बीमार या अतिआवश्यक कार्य में जुटे कर्मचारी के अतिरिक्त अन्य की ड्यूटी हटाने से प्रशासन ने इनकार कर दिया है।