बदायूं/मूसाझाग। स्वतंत्रता संग्राम में बदायूं का विशेष योगदान रहा है। यहां गुलड़िया के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों का बनाया नमक का कानून तोड़ा था। करीब 1500 क्रांतिकारी एक स्थान पर जमा हुए थे। अंग्रेजों की दमनकारी नीति के खिलाफ नारेबाजी करके नमक बनाया गया था।
वरिष्ठ इतिहासकार प्रोफेसर गिरिराज नंदन के मुताबिक बदायूं शहर से दस किमी दूर बसे गांव गुलड़िया में नमक बनाने का काम किया जाता था। इस पर ब्रिटिश सरकार ने टैक्स लगा दिया था। सरकार द्वारा टैक्स वसूलने को कानून बनाया गया। 1929 में जब गांधी जी बदायूं आए तो गुलड़िया के क्रांतिकारियों से मुलाकात की। वर्ष1930 में जब गांधी जी ने नमक कानून के विरोध में दांडी यात्रा की तो गुलड़िया के स्वतंत्रता सेनानी मुंशी हेतराम सिंह व साथियों ने इस आंदोलन को गति दी। गांधी जी ने क्रांतिकारियों से कहा था कि 6 अप्रैल से 13 अप्रैल तक पूरे देश भर में यह कानून भंग किया जाए। तब गुलड़िया में क्रांतिकारियों के साथ मिलकर मुंशी हेतराम सिंह ने कानून तोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। गुलड़िया के रणवीर सिंह के खेत में नमक बनाकर सरकार के खिलाफ गुस्सा जताया गया। गांव से दक्षिण दिशा में इस खेत में अब आलीशान बरातघर बना हुआ है।
क्रांतिकारी ऐसे बनाते थे गुलड़िया में नमक
गुलडिया में नमक बनाने के लिए रस्सियों से घेरकर एक बांडा बनाया गया था। उसके अंदर क्यारी बनाकर नूनखुरी मिट्टी जमाकर उस पर पानी छिड़क दिया गया। पानी रिसकर नीचे नाली द्वारा निकलता था जो बाद मे जमकर बड़े बड़े कड़ाहों में उबाला जाता था। कड़ाहों में पपड़ी नीचे रह जाती थी। वह इकट्ठी कर ली जाती थी। यही नमक होता था। कानून भंग करने के समय लगभग दस से पंद्रह हजार स्त्री पुरुष मौजूद थे। पूरे जिले से यहां आकर लोग जमा हुए थे। पुलिस यहां पहले ही पहुंच गई थी।
पत्नी के साथ जेल भेजे गए हेतराम
नमक कानून तोड़ने के जुर्म में मुंशी हेतराम सिंह को सन् 1931 में छह माह की सजा हुई थी। इसमे पुलिस ने उन्हें पत्नी पार्वती देवी सहित जेल भेज दिया था। पार्वती देवी गर्भवती थीं। उन्होंने जेल में ही बेटे को जन्म दिया था। बेटे का नाम कामता प्रसाद रखा गया। उनके एक बेटा और 6 बेटियां हैं। बेटे का नाम अर्जुन सिंह है। सभी बेटे-बेटियों की शादी हो चुकी है।
गुलड़िया मतलब क्रांतिकारियों की बस्ती
मुंशी हेतराम ही नहीं, गुलडिया के कई और क्रांतिकारियों को सजा और जुर्माना हुआ था। नमक कानून तोड़ने के सत्याग्रह के जुर्म में मुंशी हेतराम सिंह को सन 1931 में 6 महीने, टीकाराम सिंह को तीन बार में डेढ़ साल, बादाम सिंह को सन 1932 में 6 महीने, जोरावर सिंह को सन 1932 में 6 महीने और जुर्माना, रणवीर सिंह को सन 1930 में 3 महीने, नारायण सिंह को सन 1930 में 6 महीने, बलराम सिंह को सन 1930 में 3 महीने की सजा हुई थी। इनके नाम आज भी गुलडिया की जनता को याद हैं।
- बदायूं क्रांतिकारियों की धरती रही है। गुलड़िया गांव में ही मुंशी हेतराम समेत कई क्रांतिकारी थे। इन्होंने जिले में नमक का कानून तोड़कर अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी। रुहेलखंड के इंतिहास में यह चर्चित घटनाओं में से एक है। मैंने भी इस बारे में काफी अध्ययन कर जानकारियां जुटाई और संकलित की हैं। - प्रोफेसर गिरिराज नंदन, वरिष्ठ इतिहासकार