फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सौहार्द की मिसाल: इस शहर में चुन्ना मियां ने बनवाया मंदिर, शर्मा जी की मस्जिद में पूरी होती है हर मन्नत

Sat, 20 Jan 2024 11:16 AM IST
मुकेश कुमार महबूब आलम, बरेली ब्यूरो

सार

यूं तो दुनियाभर में बरेली की अपनी अलग पहचान है, लेकिन चुन्ना मियां का बनवाया मंदिर और शर्मा जी की मस्जिद इस पहचान और खास बना देती है। यह दोनों धर्म स्थल सौहार्द की मिसाल हैं। इनका इतिहास वर्षों पुराना है।  
विज्ञापन
चुन्ना मियां का मंदिर और शर्मा जी की मस्जिद - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बरेली अमन का शहर है। यहां सात नाथ मंदिर हैं तो विश्व प्रसिद्ध आला हजरत दरगाह भी है। जैन तीर्थ और गुरुद्वारे यहां सौहार्द को बढ़ावा दे रहे हैं। यहां की गंगा-जमुनी तहजीब अपने आप में मिसाल है। शहर के चुन्ना मियां ने कटरा मानराय में लक्ष्मी-नारायण मंदिर बनवाकर इस परंपरा को आगे बढ़ाया तो राजेंद्र शर्मा ने मुस्लिम भाइयों को इबादतगाह की सौगात दी। यहां की गलियों में एक तरफ आरती की धुन सुनाई देती है तो दूसरी ओर अजान होती है। इनकी जुगलबंदी से जो सौहार्द के सुर निकलते हैं, उससे शहरवासी सुकून महसूस करते हैं।

विज्ञापन


सेठ फजलुर्रहमान उर्फ चुन्ना मियां सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई ऐसे कार्य किए, जिनके लिए उन्हें सदियों तक याद किया जाता रहेगा। कटरा मानराय स्थित लक्ष्मी-नारायण मंदिर भी उन्हीं में से एक है। देश के विभाजन के बाद कई सिंधी, हिंदू व पंजाबी परिवार यहां आकर बस गए। किसी तरह उन्होंने आशियाना तो बना लिया पर पूजा-पाठ के लिए कोई जगह नहीं मिली। इस पर उन्होंने चुन्ना मियां की इस जमीन को खुद ही चुन लिया।

मंदिर निर्माण में चुन्ना मियां ने किया था श्रमदान - फोटो : अमर उजाला
शुरुआत में चुन्ना मियां ने इसका विरोध किया। मामला न्यायालय तक पहुंचा। बाद में उनका हृदय परिवर्तन हुआ तो उन्होंने यह जमीन मंदिर के लिए दान दे दी। साथ ही निर्माण सामग्री भी उपलब्ध कराई और निर्माण में श्रमदान भी किया। 1960 में यह मंदिर तैयार हुआ तो तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसका लोकार्पण किया था। 

80 हजार हुए खर्च: अयोध्या जाएगी विश्व की सबसे लंबी बांसुरी, मुस्लिम कारीगरों ने की तैयार; बजेंगे सातों सुर

चुन्ना मियां आजीवन इस मंदिर से जुड़े रहे। उनके इंतकाल के बाद उनके पुत्र अतीकुर्रहमान भी मंदिर से जुड़े रहे। अब चुन्ना मियां के पौत्र डॉ. नजमुल रहमान इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। मंदिर के पुजारी पंडित प्रमोद मिश्रा ने बताया कि फिलहाल, दो साल से चुन्ना मियां के परिवार से कोई भी मंदिर नहीं आया है। वर्तमान में मंदिर का संचालन प्रबंध कमेटी करती है। 
विज्ञापन

शर्मा जी की मस्जिद - फोटो : अमर उजाला
शर्मा जी की मस्जिद में हर मन्नत होती है पूरी
आज से करीब 300 वर्ष पहले नया टोला आलमगिरिगंज निवासी पंडित दासीराम शर्मा ने खंडहरनुमा मस्जिद का पुनर्निमाण कराया था। इसे शर्मा जी की मस्जिद या बुध वाली मस्जिद भी कहते हैं। मान्यता है कि यहां जो भी लगातार सात बुधवार को इबादत के लिए आता है, उसकी हर मन्नत पूरी होती है। आज भी इस मस्जिद की एक चाबी शर्मा जी के वंशज संजय शर्मा के पास रहती है। 

संजय शर्मा ने बताया कि उनके पूर्वज पंडित दासीराम शर्मा दोनों धर्मों का समान आदर करते थे। इसीलिए इस मस्जिद का निर्माण कराया था। संजय के पिता पंडित राजेंद्र शर्मा भी इस मस्जिद से भावनात्मक रूप से जुड़े रहे। सुबह वही मस्जिद का द्वार खोलते थे। दो साल पहले उनका निधन हो गया। संजय शर्मा का कहना है कि अब भी एक चाबी उनके पास रहती है लेकिन व्यस्तता की वजह से वह मस्जिद तक पहुंच नहीं पाते। विशेष अवसरों या बुलावे पर ही उनका वहां जाना होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें