लीलौर झील प्रोजेक्ट में हुए घपलों की परतें धीरे धीरे खुलने लगी हैं। सिंचाई मंत्री ने प्रारंभिक रिपोर्ट मिलते ही चीफ इंजीनियर पर पहली गाज गिरायी है। सिंचाई मंत्री ने माना कि उनके खिलाफ कई शिकायतें थी लेकिन उनके साथ ही कई और तबादले कर उनके दंड के अहसास को कम भी कर दिया है। उधर, गोरखधंधे में शामिल इंजीनियर और ठेकेदार चिह्नित होना शुरू हो गए हैं।
सिंचाई विभाग में बैठे घाघ इंजीनियरों ने कागजों पर ही बैराज और डैम अनुरक्षण, मरम्मत और सफाई आदि करा दी। इस पर खर्च हुए करीब 250 करोड़ रुपये में से ज्यादातर रकम डकार गए। लीलौर झील प्रोजेक्ट में आया बजट भी ठेकेदार, नेता और अफसरों ने बांट लिया। नयी सरकार बनी तो बरेली से ही धर्मपाल सिंह सिंचाई बन गए। उन्होंने पहली प्रेस वार्ता में कहा था कि सिंचाई विभाग और लीलौर झील में हुए घपलों की जांच होगी और इसमें शामिल बख्शे नहीं जाएंगे। सिंचाई मंत्री ने कुछ वरिष्ठ इंजीनियरों से लीलौर झील प्रोजेक्ट की जांच की जिम्मेदारी सौंपी, अखबारों में सुर्खियां बनने के बाद नामित अफसरों ने मौके पर जांच कर पिछले दिनों प्रारंभिक जांच सौंपी थी। इसमें गड़बड़ी के संकेत देने के साथ ही खास अफसर साफ सुथरे बताए गए।
चीफ इंजीनियर से चार्ज छिना
सिंचाई मंत्री ने लीलौर झील मामले की जांच आख्या मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी। सबसे पहले चीफ इंजीनियर रुहेलखंड मंडल अजय कुमार सिंह से चार्ज छीन कर स्वारा डैक में तैनात कर दिया है। सिंह इंजीनियर एसोसियेशन अध्यक्ष हैं, उनका कार्य क्षेत्र हरिद्वार, मुरादाबाद, बरेली, सीतापुर, खीरी से लेकर लखनऊ तक था। इससे पहले अधीक्षण अभियंता जीवन राम मुख्यालय से संबद्ध किए जा चुके हैं और अधिशासी अभियंता रामबहादुर लंबे अवकाश पर हैं।
कब शुरू होगी बैराजों पर हुए फर्जी कामों की जांच?
पिछले पांच वर्षों में सिंचाई विभाग में जमकर लूटपाट हुई है। शारदा, नानक सागर, बनबसा, लोहिया, धौरा बैराज और डैम पर कागजी अनुरक्षण कार्य हुए हैं। इन पर करीब 250 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन मौके पर फर्जीवाड़ा हुआ। ‘अमर उजाला’ ने इस पर खुलासा किया है, लेकिन जांच अफसरों ने मौन साध रखा है। हालांकि सिंचाई मंत्री ने फिर दोहराया कि घपलेबाज बख्शे नहीं जाएंगे।
वर्मा का कद बढ़ा, कई इधर उधर
बरेली में तैनात चीफ इंजीनियर ओम वर्मा का कद बढ़ा है, उन्हें अजय कुमार सिंह का कार्यभार मिला है। चीफ इंजीनियर राकेश गुप्ता मेरठ से परिकल्पना लखनऊ, सुधीर शर्मा मेरठ, विजय सिंह गाेंडा से विंध्याचल, इलाहाबाद, ओपी श्रीवास्तव कानपुर से लखनऊ, राकेश पांडे नियोजन से स्वारा लखनऊ, विनोद गर्ग कार्मिक से यमुना, ओखला खाली पद पर तैनात हुए हैं। पदोन्नत महेंद्र विक्रम सिंह सरयू परियोजना में, अनिल श्रीवास्तव लखनऊ से वेतवा योजना झांसी, सुरेश शर्मा लखनऊ से वनारस खाली पद पर, विजय गुप्ता परिसंपत्ति व सज्जा, विनोद त्रिपाठी लखनऊ से कानपुर, चंद्रेश जैन परिकल्पना लखनऊ, सिद्ध नरायण शर्मा कार्मिक अधिष्ठान लखनऊ, भानुप्रताप सिंह फैजाबाद से गोरखपुर खाली पद पर गए हैं।
‘चीफ इंजीनियर अजय सिंह और कुछ अन्य अफसरों को शिकायतों के आधार पर इधर उधर किया गया है। कुछ पदोन्नत हुए हैं तो कुछ स्वयं के अनुरोध नए स्थान पर तैनात हुए हैं। लीलौर झील प्रोजेक्ट, बैराज और डैम में कागजी कार्य करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे।’
- धर्मपाल सिंह, सिंचाई मंत्री