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Chaitra Navratri 2025: पंचग्रही योग में हाथी पर सवार होकर आएंगी मां जगदंबा, 30 मार्च से चैत्र नवरात्र

Thu, 20 Mar 2025 12:54 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्र 30 मार्च से शुरू होंगे। तृतीया तिथि का क्षय होने के कारण इस बार नवरात्र आठ दिन के ही होंगे।
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Chaitra Navratri 2025 - फोटो : adobe
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विस्तार
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पंचग्रही योग में 30 मार्च को नव संवत्सर 2082 और चैत्र नवरात्र का आगाज होगा। तृतीया तिथि का क्षय होने के कारण इस बार नवरात्र आठ दिन के ही होंगे। देवी भागवत के अनुसार, जब नवरात्र रविवार से प्रारंभ होता है तो जगदंबा हाथी पर सवार होकर आती हैं। यह बेहद शुभ माना जाता है। हाथी को सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है। माता भक्तों को यश-वैभव, धन-संपदा प्रदान करती हैं। इस वर्ष के राजा और मंत्री सूर्य हैं।

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ज्योतिषाचार्य मुकेश मिश्रा के अनुसार नव संवत के पहले दिन मीन राशि में सूर्य के साथ चंद्रमा, शनि, बुध, राहु एक साथ विद्यमान रहेंगे। इससे पंचग्रही योग का निर्माण होगा। साथ ही इस दिन बुधादित्य और मालव्य राजयोग भी बन रहे हैं। आठ दिन के नवरात्र के दौरान चार दिन रवि योग और तीन दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग रहेगा।

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घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार वासंतिक नवरात्र के पहले दिन 30 मार्च को घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:12 से लेकर 10:20 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है। यह सुबह 11:59 से लेकर दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा।

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घट स्थापना की विधि
नवरात्र के दिन पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर लें। एक लकड़ी का पटरा रखकर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। मिट्टी के पात्र में जौ बो लें। इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। कलश में सुपारी, दूर्वा, फूल व थोड़ा सा इत्र डाल दें। कलश में पंच रत्न और कुछ सिक्के भी डालें। इस पर अशोक या आम के पांच पत्ते रख दें। 

कलश के ऊपर नारियल लाल कपड़ा लपेटकर रख लें। आखिर में रोली, चंदन, चावल, जनेऊ, इत्र, और फूल माला चढ़ाएं। साथ ही मीठे का भोग लगाएं। दीपक जलाकर कलश की पूजा करें। नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ व मंत्रों का जप आदि करना चाहिए।
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