बरेली मंडल को चावल उत्पादन और निर्यात क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां का बासमती और गैर-बासमती चावल देश के बड़े बंदरगाहों के जरिये विदेशों में भेजा जाता है। ब्रिक्स समझौतों से इस क्लस्टर को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह पहल स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक होगी। इन समझौतों से निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
स्थानीय उत्पादों के निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे
जिले में 'एक जिला, एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के तहत बांस के उत्पाद और फर्नीचर विदेशी खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। फर्नीचर कारोबारी सौरभ गर्ग ने बताया कि बांस से बने घर सजाने के सामान, सोफे, टेबल और कुर्सियों की विदेशों में अच्छी मांग है।
उन्होंने कहा, ब्रिक्स देशों के साथ व्यापारिक समझौते होने से एसेंशियल ऑयल और अन्य स्थानीय उत्पादों के निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे। जिले में बड़े पैमाने पर फर्नीचर का काम होता है, लेकिन प्रत्यक्ष निर्यात की सुविधा न होना एक बड़ी बाधा है। बरेली में एक समर्पित फर्नीचर केंद्र बनने से व्यापारियों को सीधे विदेशी ऑर्डर मिल सकते हैं और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।