भाजपा का बढ़ा मत प्रतिशत, कांग्रेस तीसरे पायदान पर
बरेली लोकसभा सीट से वर्ष 2019 में भाजपा प्रत्याशी संतोष गंगवार को 52.91 फीसदी मत मिले थे। वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 48.51 फीसदी ही था। यहां सपा प्रत्याशी को वर्ष 2014 में 25.98, बसपा प्रत्याशी को 9.93 फीसदी मत मिले थे। वर्ष 2019 के गठबंधन में सपा प्रत्याशी भगवत सरन गंगवार को 37.25 फीसदी मत मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी रहे प्रवीण सिंह ऐरन को वर्ष 2019 में 6.95 फीसदी वोट मिले थे, जबकि वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 7.88 फीसदी था।
आंवला लोकसभा सीट पर वर्ष 2019 में भाजपा प्रत्याशी धर्मेंद्र कश्यप ने 13 फीसदी की बढ़त बनाई। वर्ष 2014 में उन्हें 38.94 फीसदी और वर्ष 2019 में 51.07 फीसदी वोट मिले थे। सपा को वर्ष 2014 में 25.79 और बसपा को 18.07 फीसदी मत पड़े थे। वर्ष 2019 के गठबंधन में बसपा प्रत्याशी रूचिवीरा को 40 फीसदी से ज्यादा मत मिले थे। यहां भी कांग्रेस के मत फीसदी में गिरावट रही और वर्ष 2019 में करीब तीन फीसदी कमी के साथ 5.94 फीसदी मत ही हाथ लगे थे।
59.38% मतदाताओं ने दिया था भाजपा का साथ
पीलीभीत सीट पर वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा के वरुण गांधी को 59.38 फीसदी मतदाताओं का साथ मिला था। यहां से उनकी मां मेनका गांधी ने वर्ष 2014 में 49.09 फीसदी मत पाकर जीत दर्ज की थी। वर्ष 2019 में गठबंधन के तहत सपा प्रत्याशी को 37.83 फीसदी मत मिले थे, जबकि वर्ष 2014 के चुनाव में सपा को 20.22 और बसपा के अनीस अहमद खान उर्फ फूलबाबू को 16.54 फीसदी लोगों का साथ मिला था।
शाहजहांपुर में भी भाजपा ने अपनी बढ़त कायम रखी और वर्ष 2014 में 44.27 फीसदी मतों के साथ कृष्णा राज संसद पहुंचीं तो वर्ष 2019 में अरुण सागर को 58.09 फीसदी मत मिले। यहां कांग्रेस दोनों ही चुनाव में तीन फीसदी जनाधार पर सिमटी रही।
गठबंधन के खिलाफ मजबूत हुए अजय मिश्रा टेनी
लखीमपुर खीरी में वर्ष 2014 में 35.07 फीसदी मत पाकर जीत दर्ज करने वाले अजय मिश्रा टेनी वर्ष 2019 में करीब 18 फीसदी ज्यादा मत पाकर संसद पहुंचे। उन्हें बसपा-सपा गठबंधन के दौर में 53.63 फीसदी मत मिले थे। वर्ष 2014 में 14 फीसदी मतों पर अधिकार रखने वाली कांग्रेस वर्ष 2019 में 8.11 फीसदी पर खिसक गई।
ऐसी ही स्थिति धौरहरा लोकसभा सीट पर रही। यहां वर्ष 2019 में भाजपा को 48.21 फीसदी मत मिले थे, जबकि वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 33.87 फीसदी था। यहां वर्ष 2014 के मुकाबले वर्ष 2019 में कांग्रेस का एक फीसदी मत खिसका और यह 15.31 फीसदी पर पहुंच गया था।
10 फीसदी ज्यादा मत पाकर भाजपा ने दर्ज की पहली जीत
सपा का गढ़ बन चुके बदायूं लोकसभा सीट पर भाजपा ने वर्ष 2019 में पिछले चुनाव के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा मत ज्यादा पाकर पहली जीत दर्ज की थी। यहां वर्ष 2014 में भाजपा के बागीश पाठक को 30.71 फीसदी मिले थे, जबकि वर्ष 2019 में संघमित्रा मौर्य ने 47.3 फीसदी मत पाकर 45.59 फीसदी मत पाने वाले सपा के धर्मेंद्र यादव को पटखनी दी। धर्मेद्र को वर्ष 2014 में 46.2 फीसदी मत मिले थे। यहां कांग्रेस के सलीम इकबाल शेरवानी वर्ष 2019 में सिर्फ 4.8 फीसदी वोट हासिल कर पाए थे।