बरेली। जालसाजों ने केंद्र सरकार के योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की फर्जी वेबसाइट बनाकर तमाम फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बना डाले। लोगों को शक न हो इसके लिए इन पर फर्जी क्यूआर कोड भी छापा गया। पुष्टि के लिए उसे वेबसाइट से भी लिंक कर दिया। ऐसे ही दो जन्म प्रमाणपत्र जांच के लिए नगर निगम पहुंचे तो मामला पकड़ में आया। इस पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार की ओर से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि नवाबगंज के गांव जगराजपुर में रहने वाले राकेश मिश्रा के पुत्र अमन मिश्रा और फरीदपुर के गांव फैजनगर के संतोष गंगवार के बेटे अक्षु गंगवार के जन्म प्रमाणपत्र जांच के लिए नगर निगम को भेजे गए थे। जांच में वे प्रमाणपत्र फर्जी निकले, क्योंकि वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के बजाय योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की ओर से जारी किए गए थे। नगर निगम के लिपिक खलीक अहमद और मुकेश कुमार ने उन पर बने क्यूआर कोड को स्कैन किया तो वे लोग फौरन ही उस वेबसाइट से कनेक्ट हो गए, जहां से इन्हें जारी किया गया था। आम आदमी अगर इस प्रमाणपत्र की जांच भी करता है तो उसे फर्जी होने की जानकारी नहीं हो पाती।
आगरा समेत कई जगह हुआ फर्जीवाड़ा
मामला पकड़ में आने पर नगर निगम की ओर से योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग को ई मेल भेजकर इस बारे में अवगत कराया गया। इस पर वहां से जानकारी मिली कि आगरा समेत कई नगर निगम क्षेत्र में इस तरह का फर्जीवाड़ा हुआ है। साथ ही इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।
400-1000 रुपये तक वसूले
फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने वाले लोगों से चार सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये वसूल किए। जो लोग अपने प्रमाणपत्रों की जांच कराने के लिए नगर निगम पहुंचे थे, फर्जीवाड़ा का अहसास होने पर वहां से चुपचाप खिसक लिए। इस वजह आरोपियों के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं हो सकी। उन लोगों ने इतना जरूर बताया कि किसी दूसरे व्यक्ति के जरिये व्हाट्सएप पर उनसे डिटेल लेकर जन्म प्रमाणपत्र व्हाट्सएप पर ही उपलब्ध करा दिया गया था।
फेसबुक पर पोस्ट डालकर फंसाया, अब गायब
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद इस मामले में पड़ताल में तमाम चीजें सामने आई हैं। एक व्यक्ति ने फेसबुक पर इस संबंध में पोस्ट डाली है कि घर बैठकर जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया जा सकता है। उसने कहा है कि यह बिल्कुल सही है और एक दिन से लेकर 70 वर्ष तक की आयु का कोई भी व्यक्ति बनवा सकता है। मगर रिपोर्ट दर्ज होने के बाद यह पोस्ट और उस व्यक्ति का अकाउंट गायब हो गया है। लोगों को फंसाने के लिए उसने अपना जन्म प्रमाणपत्र भी फेसबुक पर शेयर किया है।
‘किसी व्यक्ति ने फर्जी वेबसाइट बनाकर लोगों के जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिए। मामला पकड़ में आने पर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।’
- डॉ. अशोक कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी