चार अस्पतालों ने आयुष्मान कार्ड धारकों से वसूल लिया मनमाना बिल
बरेली। कोविड काल में आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों के इलाज का मन मुताबिक बिल बनाकर वसूली की गई। शासन स्तर पर तमाम शिकायतें पहुंचने के बाद जिला शिकायत निवारण समिति की बैठक में आरोपी चार अस्पतालों के खिलाफ जांच की गई। समिति ने इन अस्पतालों को ज्यादा वसूले गए रुपये लौटाने के निर्देश दिए हैं। इधर, रामपुर बाग के एक पेड कोविड अस्पताल में बगैर जांच के मरीज को भर्ती कर उसका कोरोना का इलाज किया गया। उसकी मौत हो जाने के बाद परिजन अब उसे कोरोना संक्रमित दर्ज कराने के लिए भटक रहे हैं।
रामपुर बाग के पेड कोविड अस्पताल में अप्रैल में सांस फूलने से हालत बिगड़ने पर एक मरीज भर्ती हुआ था। परिजन का आरोप है कि इलाज सही न होने से मरीज की मौत हो गई। इलाज के बाद लंबा चौड़ा बिल बना दिया गया। उस वक्त चूंकि परिजन सदमे में थे लिहाजा शिकायत नहीं कर सके। अब जब मृतक के बच्चों को मुख्यमंत्री बाल कल्याण योजना का लाभ दिलाने कार्यालय पहुंचे तो उनसे मृतक के कोरोना संक्रमित होने का प्रमाण मांगा गया। अस्पताल के बिल या मृतक प्रमाण पत्र में कहीं भी संक्रमित दर्ज नहीं था। अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने उन पर ही जांच न कराने का ठीकरा फोड़ दिया। परिवार ने मामले की शिकायत की है।
बुधवार को एडीएम (प्रशासन) की अध्यक्षता में शिकायत निवारण की बैठक में जांच रिपोर्ट न होने के मामले में अस्पताल को क्लीन चिट दे दी गई। बृहस्पतिवार को परिजन जिला महिला अस्पताल के आयुष्मान केंद्र पर एक्स-रे लेकर पहुंचे तो कर्मचारियों ने उन्हें प्रकरण की दोबारा जांच कराने की मांग करने का सुझाव देकर लौटा दिया। परिजन का आरोप है कि अस्पताल ने उन्हें मरीज को संक्रमित बताकर गुमराह किया। वह दोबारा शिकायत करेंगे।
मेडिकल कॉलेज प्रकरण में भारत सरकार से मांगे दिशानिर्देश
बैठक में दो शिकायतें एक मेडिकल कॉलेज में मनमाना बिल वसूलने और उत्तराखंड का आयुष्मान कार्ड स्वीकार न करने की थीं। आयुष्मान के डीजीएम अमीर बेग ने बताया कि आरोपी व्यक्ति से वीडियो कॉल के जरिए शिकायत की सुनवाई की गई। प्रकरण में उत्तराखंड राज्य से प्राप्त शिकायतों के संबंध में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी से दिशानिर्देश मांगने के निर्देश मिले हैं। इसके अलावा सिटी स्टेशन रोड के एक अस्पताल को मरीज से ज्यादा वसूले गए 52 हजार रुपये वापस कराए गए।
रिकॉर्ड में 22 हजार, आरोप सवा दो लाख वसूली का
उधर, इज्जतनगर के एक अस्पताल के खिलाफ मेडिकल बोर्ड से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, आयुष्मान कार्ड में वल्दियत गलत होने से कार्ड अप्रूव नहीं हो सका था। पीड़ित किरान अली ने इलाज के नाम पर सवा दो लाख रुपये की वसूली का आरोप लगाया। बिलों की जांच की गई तो उसमें 22 हजार रुपये लेने की ही पुष्टि हो सकी है। शिकायतकर्ता ने अस्पताल पर बिल बनाने में भी खेल करने का आरोप लगाया है। मेडिकल बोर्ड मामले की जांच करेगा।
कार्ड होने के बाद भी वसूली करने वाले अस्पतालों से होगी रिकवरी
आयुष्मान योजना के जिला नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीज से इलाज का बिल वसूलने वाले अस्पतालों से धनराशि वापस कराई जाएगी। अगर और भी ऐसे मामले हैं तो लाभार्थी साक्ष्य समेत शिकायत कर सकते हैं। जांच के बाद आरोप सही मिलने पर रुपये वापस कराए जाएंगे। जहां तकनीकी वजहों से कार्ड अप्रूव नहीं हुआ है, उसकी पड़ताल कराई जाएगी।