खुली जगह में जलाएं पटाखे, बच्चों को तेज आवाज वाले पटाखों से रखें दूर
बरेली। हाल ही में बाढ़ और मौसम में आ रहे बदलाव की वजह से नमी बढ़ गई है। इस दौरान पटाखा चलाने से धुंध छाने से सेहत को खतरा होने की आशंका स्वास्थ्य विभाग ने जताई है। सीएमओ ने ऐसे पटाखे जो ज्यादा धुआं छोड़ते हैं, उनका प्रयोग न करने की सलाह दी है। साथ ही, किसी भी तरह की दुर्घटना से बचाव के लिए सतर्कता के साथ आतिशबाजी करने की अपील की है।
अभी कुछ दिन पहले ही जिले को बाढ़ और जलभराव से राहत मिली है। इसकी वजह से वातावरण में नमी बरकरार है। नमी को देखते हुए ही स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिवाली पर ज्यादा धुआं वाले पटाखों को न जलाने की अपील की है। सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह के मुताबिक, नमी से पटाखे का धुआं ऊपर न जाकर नीचे ही बना रहता है, जो सांस के जरिए फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। धुएं में मौजूद कैडमियम फेफड़ों में ऑक्सीजन की मात्रा को कम करता है। इससे श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इसके साथ ही इसमें मौजूद सल्फर, कॉपर, बेरियम, लेड और एल्युमिनियम आदि भी सांस के जरिए श्वसन तंत्र को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रोहित के मुताबिक, अभी बरेली में प्रदूषण का स्तर मॉडरेट यानी सौ एक्यूआई के आसपास दर्ज हो रहा है। पटाखों के चलने से प्रदूषण का खतरा बढ़ने की आशंका जताते हुए लोगों से कम पटाखों का प्रयोग करने की अपील की है।
ध्यान दें.. जरा सी लापरवाही पड़ सकती है खुशियों पर भारी
बरेली। पटाखे से निकलने वाली चिंगारी से बचाव में चूक के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। लिहाजा, पटाखा जलाते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। खासकर बच्चों को बड़े अपनी देखरेख में ही पटाखा जलाने दें ताकि खुशियां बरकरार रहें। अनहोनी होने पर खुद इलाज करने के बजाय तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें।
जिला चिकित्सालय के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एके गौतम के मुताबिक शरीर का सर्वाधिक संवेदनशील अंग आंखें हैं। इनमें हल्का सा भी बारूद पड़ जाए तो रोशनी जाने का खतरा रहता है। इसलिए पटाखा जलाते समय बेहद नजदीक जाने से बचें। माचिस से सीधे पटाखा न जलाएं, बल्कि इसके लंबी लंबी फुलझड़ी का इसंतेमाल करें। पानी भरी बाल्टी और जग पास रखें। पटाखा से परिवार के सदस्य दस फुट दूर रहें। रॉकेट हमेशा रेत में फंसाकर चलाएं। आंख में कुछ भी पड़ जाए तो ठंडे पानी से धोएं। ईएसआईसी अस्पताल के ईएनटी डॉ. अनिल जैन ने बताया कि तेज आवाज वाले पटाखे से कान का परदा फट सकता है, इसलिए ज्यादा आवाज वाले पटाखे चलाने से बचें।
छोटे बच्चे, बुजुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाएं पटाखे न चलाएं। तेज आवाज से दिक्कत होने पर तत्काल चिकित्सक को दिखाएं। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन के मुताबिक पटाखा या दीया जलाते समय असावधानी से सबसे अधिक त्वचा प्रभावित होती है। अगर पटाखों से जल जाएं तो त्वचा रगड़ने के बजाय उसे ठंडे पानी से धोएं। फफोले पड़ जाने पर छेड़छाड़ न करें। सूती वस्त्र पहनें। ढीले कपड़े पहनने से बचें। ब्यूरो
102 और 108 एंबुलेंस रहेंगी सक्रिय
बरेली। दिवाली पर दुर्घटना की आशंका के चलते शासन से एंबुलेंस कर्मचारियों को अलर्ट रहने के निर्देश जारी हुए हैं। प्रोग्राम मैनेजर सुमित कुमार ने बताया कि बरेली में संचालित 108 और 102 स्वास्थ्य सेवा की 43-43 एंबुलेंस सेवाएं प्रदान कर रही हैं। सभी एंबुलेंस को हॉटस्पॉट पर रहने के निर्देश जारी हुए हैं। ताकि पीड़ित को तत्काल सेवाएं मुहैया कराई जा सकें। एंबुलेंस प्रभारी समर श्रीवास्तव ने बताया कि गर्भवती महिला या बच्चों को तकलीफ होने पर लोग 102 डायल करें। सेवा पूरी तरह निशुल्क है। अगर कहीं कोई कर्मचारी रुपये मांगे तो उसकी शिकायत दर्ज कराएं। ब्यूरो