जेल में रची थी उमेश पाल हत्याकांड की साजिश
माफिया अशरफ का साला सद्दाम तीन साल से बरेली में ही किराये पर रह रहा था। वह प्रयागराज के रसूखदारों, शूटरों व अन्य जगह से आए लोगों की अशरफ से जेल में मुलाकात कराता था। यहां जिला जेल में अफसरों से लेकर सिपाहियों तक उसने नेटवर्क फैला रखा था। उमेश पाल हत्याकांड की जांच में सामने आया था कि हत्या की साजिश बरेली जिला जेल में ही रची गई थी।
उमेश पाल की हत्या करने वाले शूटरों की अशरफ से मुलाकात कराने में भी सद्दाम और उसके खास गुर्गे बरेली निवासी लल्ला गद्दी की भूमिका सामने आई थी। बिथरी थाने में सद्दाम, लल्ला गद्दी और उसके अन्य गुर्गों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। दूसरा मुकदमा सद्दाम व उसके साथियों के खिलाफ बारादरी थाने में दर्ज हुआ था।
दोनों मुकदमों की विवेचना के लिए सीओ तृतीय के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई थी। अशरफ व सद्दाम के गुर्गों को जेल भेजा गया था। जेल के आरक्षी भी जेल गए थे। फिर नौ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। उमेश पाल की हत्या के बाद सद्दाम भूमिगत हो गया था। आखिरकार पुलिस ने उसे दबोच लिया।