बरेली में प्रस्तावित यूपी का पहला ईको टेक्सटाइल पार्क भू- उपयोग के दांवपेच में फंस कर रह गया है। पीपीपी माडल पर यह प्रोजेक्ट मार्च 2016 तक पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन प्रदेश सरकार से सहयोग न मिलने के कारण वस्त्र मंत्रालय एक बार फिर प्रोजेक्ट की अवधि बढ़ाने की तैयारी में है। वस्त्र मंत्रालय का जबाव पड़ने के बाद एक महीने पहले ही भूउपयोग बदलने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब दो साल में प्रस्ताव गया है तो वहां से आगे बढ़ने में भी समय तो लगेगा ही।
केंद्र में भाजपा सरकार बनते ही वस्त्र राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष गंगवार ने अपने बरेली में अपना ड्रीम प्रोजेक्ट टेक्सटाइल पार्क स्वीकृत कराया था। पीपीपी मोड से बनने वाले इस पार्क के लिए फतेहगंज पश्चिमी के गांव रहपुरा जागीर में 36.30 एकड़ जमीन भी चिन्हित हो गई थी। वस्त्र मंत्रालय से 124.52 करोड़ रुपये भी स्वीकृत हो गए। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इस प्रोजेक्ट मार्च 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। हकीकत यह है कि पिछले एक साल में जमीन पर कब्जा तक नहीं मिल पाया क्योंकि जमीन के कुछ हिस्से में चकबंदी प्रक्रिया लंबित है। कई मामले में हाईकोर्ट में चल रहे हैं।
टेक्सटाइल पार्क की प्रस्तावित भूमि बरेली विकास प्राधिकरण के कार्य क्षेत्र में आती है। इसलिए इसका भू उपयोग कृषि से औद्योगिक में बदलने का प्रस्ताव पिछले महीने कमिश्नर प्रमांशु कुमार ने बोर्ड में पास करके शासन को भेज दिया था। अब ये प्रस्ताव को आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के पास है।
कोट
‘ यह अच्छा प्रोजेक्ट है, इसको पूरा कराने के लिए प्रमुख सचिव भारी उद्योग संजय अग्रवाल से वार्ता हुई है। उन्होंने जल्द ही भू उपयोग परिवर्तित करने का आश्वासन दिया है। पिछले दिनों बोर्ड से इसका प्रस्ताव पास कराके शासन को भेज दिया गया था।’ प्रमांशु कुमार, कमिश्नर
‘इस प्रोजेक्ट के आने से बरेली और आसपास के जिलों में औद्योगिक माहौल बनेगा। प्रदेश सरकार जनहित में जल्द से जल्द सारी अड़चनें दूर कराए। सड़क और बिजली आदि मूलभूत सुविधाएं भी सरकार उपलब्ध कराए। इस पार्क से कई हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।’ संतोष गंगवार, केंद्रीय वस्त्र मंत्री