पहले भी सामने आए सेना भर्ती में ठगी के मामले
- वर्ष 2012 में मेरठ के आदेश गुर्जर और आदित्य चौहान के गैंग ने बरेली में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिये कई युवकों को सेना में भर्ती कराने की कोशिश की थी। इसका खुलासा प्रमाणपत्रों के ऑनलाइन सत्यापन के दौरान हुआ था।
- अक्तूबर 2014 में सैन्य वर्दीधारी युवक ने अलीगढ़ के हामिदपुर निवासी मनोज, बृजपाल, संजू, गौरव और मेरठ में गांव रोही निवासी नकुल से हापुड़ में सौदा तय करने के बाद बरेली में उनसे 15 लाख रुपये वसूले थे।
- फरवरी 2015 में राजस्थान में धौलपुर के गांव पिदावली में रहने वाला शैलेंद्र परिहार फर्रुखाबाद के अभ्यर्थी मोनू पाल की जगह मेडिकल परीक्षण कराने की कोशिश में पकड़ा गया था।
- वर्ष 2016 में भर्ती के नाम पर ठगने वाले गिरोह के चार लोगों को मिलिट्री इंटेलिजेंस ने रुपये का लेनदेन करते हुए दलाल समेत पकड़ा था। मगर गैंग का मास्टर माइंड फ रार हो गया था। जांच में एमईएस के कर्मी से सेना भर्ती के अहम दस्तावेज भी बरामद हुए थे। उस समय सुनील ने विजय कुमार निवासी गंगानगर, सुभाषनगर को गैंग लीडर बताया।
- अक्तूबर 2020 में जाट रेजिमेंट में हुई कोटा भर्ती के दौरान आगरा के खेरागढ़ निवासी अंकित और इटावा के जसवंतनगर निवासी चंद्रवीर को मेडिकल में फर्जीवाड़े के मामले में पकड़ा गया था।