फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला शिक्षा अभियान : मानसिक तनाव से उबर रहे विद्यार्थी, करें प्रोत्साहित, बच्चों को समय दें अभिभावक

Thu, 31 Mar 2022 01:44 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

प्राथमिक विद्यालय चठिया शेरगढ़ की शिक्षिका ऋतु मौर्या ने बताया कि कोविड काल में स्कूल बंद रहने का असर यह हुआ है कि बच्चों में लिखने की आदत खत्म हो गई थी। इसके अलावा लिखावट बहुत ही खराब हो गई थी।
विज्ञापन
अमर उजाला शिक्षा अभियान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छोटी कक्षाओं के बच्चों में कोविड संक्रमण काल में मानसिक तनाव के कई मामले सामने आए। अब भी लगातार इस तरह केस सामने आ रहे हैं। मनोचिकित्सक, काउंसलर और शिक्षक बच्चों को मानसिक तनाव से उबारने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। बच्चे तेजी से तनाव से उबर रहे हैं, लेकिन अभी उन्हें प्रोत्साहित करते रहने की जरूरत है। बच्चों के मोबाइल से चिपके रहने की दिक्कतें भी कम हुई हैं।

विज्ञापन


कोविड महामारी में लोग घरों में पूरी तरह से कैद हो गए। उस समय इसका सबसे बुरा असर विद्यार्थियों खासकर छोटी कक्षाओं के बच्चों पर पड़ा। करीब दो साल तक चली ऑनलाइन कक्षाओं से हर कक्षा के विद्यार्थियों की आदत मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर से चिपके रहने की बन गई। उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा होने लगा। घर से बाहर निकने पर पाबंदी ने बच्चों को अवसाद की ओर धकेल दिया। यह अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बन गई। 

करीब दो साल बाद जब इस सत्र में विद्यालय खुले तो बच्चों की इस लत से स्कूल में शिक्षकों का सामना हुआ। बच्चों की इस लत को छुड़ाने के लिए कई विद्यालयों ने काउंसलिंग क्लास शुरू कराई। मनोचिकित्सकों का भी सहारा लिया गया। अब इन मामलों में काफी हद तक कमी आई है। खासकर ऑफलाइन पढ़ाई शुरू होने के बाद मोबाइल से बच्चों की दूरी बन गई है। इससे अभिभावकों ने भी राहत की सांस ली है।
विज्ञापन


क्या-क्या दिक्कतें आई थीं सामने  
प्राथमिक विद्यालय चठिया शेरगढ़ की शिक्षिका ऋतु मौर्या ने बताया कि कोविड काल में स्कूल बंद रहने का असर यह हुआ है कि बच्चों में लिखने की आदत खत्म हो गई थी। इसके अलावा लिखावट बहुत ही खराब हो गई थी। जब स्कूल शुरू हुए और बच्चों ने आना शुरू किया तो सबसे अधिक मेहनत इसी काम में करनी पड़ी। कई बच्चे तो प्रार्थना, पिछला पढ़ाया हुआ भी भूल गए थे। पहले उनकी लिखावट ठीक कराने के कई दिनों तक मेहतन करनी पड़ी। अब काफी सुधार है लेकिन कई बच्चों के साथ अभी लगना पड़ रहा है।

याददाश्त पर भी पड़ा असर
सीबीएसई के सिटी कोर्डिनेटर वीके मिश्र ने बताया कि कोविड काल ने बच्चों में एक डर पैदा कर दिया। एकदम से ऑनलाइन क्लास शुरू हुई तो यह उनके तनाव का कारण भी बन गया। इसमें उस समय कई बच्चे उलझ गए। वह इसी में उलझ गए कि कैसे सिलेबस पूरा होगा। परीक्षा कैसे देंगे, पास कैसे होंगे। यह सब उनके दिमाग में चलता रहा और इससे उनकी विषयों को याद रखने की क्षमता पर भी असर पड़ा। हालांकि ऑफलाइन कक्षाओं के शुरू होने से यह सब काफी हद तक ठीक हो चुका है और बच्चे सामान्य हो रहे हैं।
 
यह बने तनाव का कारण, अब स्थितियां सुधर रहीं
मनोचिकित्सक डॉ. हेमा खन्ना बताती हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान बच्चों में काफी कुछ चलता रहा। अधिकतर सवाल जो उनके पास आते थे वह इस तरह से थे कि सिलेबस कैसे पूरा होगा। ऑफलाइन पढ़ाई शुरू हुई तो मोबाइल बच्चों के हाथ से ले लिया और पेन कॉपी दे दी गई। इससे भी वह तनाव में आ गए क्योंकि तब तक कई बच्चों में को मोबाइल और गेम की लत लग चुकी थी। पहले दिनभर मोबाइल हाथ में रहता था और क्लासरूम में मोबाइल नहीं ले जाने दिया गया तो यही तनाव हो गया। इस तरह के केसों की भरमार थी लेकिन अब इस तरह के मामलों में 50 फीसदी से भी अधिक कमी आई है।
 
विशेषज्ञ की सलाह  

  • अभिभावक बच्चों को समय दें।
  • तनाव के कारण जानें, उन्हें दूर करने की कोशिश करें।
  • शिक्षक बच्चों की काउंसिलिंग करें। उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें