मंदिर परिसर में विधायक के साथ ग्रामीण
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मंदिर का इतिहास
महेशपुर स्थित शिव मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1938 में बरेली के गुलाब नगर निवासी रानी लक्ष्मीबाई ने मंदिर को 105 बीघा भूमि दान दी थी। विक्रम गिरी नामक पुजारी इसकी व्यवस्था देख रहे थे। बाद में उनके चेले छेदागिरी का नाम इंतजामिया के तौर पर दर्ज हुआ। छेदागिरी के भाई हीरा गिरी ने राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम जुड़वा लिया।
अधिकारियों का आश्वासन
यह महेशपुर मंदिर प्राचीन होने के साथ एक सिद्ध मंदिर भी माना जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक सावन माह में पचास हजार से अधिक कांवड़िये यहां जलाभिषेक करते हैं। शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का मेला लगता है। उप जिलाधिकारी सचिन कुमार यादव ने ग्रामीणों को न्याय संगत कार्रवाई का भरोसा दिया। इस दौरान तहसीलदार सत्येंद्र कटियार सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे।