बरेली। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद कुत्तों से निजात मिलने की उम्मीद जगी है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को शैक्षिक संस्थानों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों आदि के आसपास से कुत्तों व अन्य पशुओं को आश्रय गृह भेजने का आदेश दिया गया है। अब आने वाले दिनों में नौनिहालों व छात्र-छात्राओं को स्कूल-कॉलेजों के बाहर और आम लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों के हमलों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जिले में कुत्तों के हमलों में कई मासूमों की जान जा चुकी है। अगस्त में जीआरएम स्कूल के बाहर हमलावर कुत्तों ने कई छात्रों को घायल कर दिया था। साथ ही, घुमंतू पशुओं के कारण भी हादसे होते रहते हैं। नगर निगम कुत्तों के आतंक पर अंकुश लगाने का दावा तो करता है, पर धरातल पर इसका असर नहीं दिखता। ऐसे में कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। नगर निगम के ताजा आंकड़ोें के अनुसार शहर में 45 हजार से ज्यादा कुत्ते हैं। नगर निगम इस वर्ष अब तक सिर्फ 2,116 कुत्तों का ही बधियाकरण करा सका है। ऐसे में कुत्ते शहरवासियों को आए दिन जख्म दे रहे हैं। घुमंतू पशु भी जनपदवासियों के लिए समस्या बने हुए हैं। सरकार गोशालाओं पर मोटा बजट खर्च कर रही है, पर लोगों को इस समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है।
परसाखेड़ा में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर शुरू होने का इंतजार
परसाखेड़ा में नगर निगम का एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बनकर तैयार है, लेकिन इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। मामला टेंडर प्रक्रिया में उलझा हुआ है। इसमें 200 कुत्तों को रखने की क्षमता है। यहां कुत्तों के बधियाकरण की भी व्यवस्था है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद उम्मीद है कि यह सेंटर अब जल्द शुरू हो जाएगा। संवाद
-
कुत्तों और घुमंतू पशुओं के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश और गाइड लाइन का अध्ययन करने के बाद उसका सख्ती के साथ पालन कराया जाएगा। - संजीव मौर्य, नगर आयुक्त