शातिर ठग है मुश्ताक
सुधांशु को उसकी बातों से शक हो गया। सुधांशु ने किसी से उसके बारे में जानकारी की तो पता चला कि वह शातिर ठग है और उसका असली नाम सुरेंद्र ठाकुर नहीं बल्कि मुश्ताक है। सुधांशु ने अपने रुपये वापस मांगे तो मुश्ताक मौके से फरार हो गया और अपना मोबाइल भी बंद कर लिया।
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सुधांशु ने कैंट थाने में मुश्ताक के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत की। इससे पहले सेना इंटेलिजेंस लखनऊ की बरेली इकाई के लोग उसे मिल गए। उनकी शिकायत पर पुलिस और सेना इंटेलीजेंस की टीम सक्रिय हो गईं। कुछ ही देर में मुश्ताक को गिरफ्तार कर लिया गया। कैंट थाने में उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
नाम बदलकर करता था ठगी
मुश्ताक ठगी के लिए अपने दूसरे नकली नाम का इस्तेमाल करता था। मुश्ताक का असली नाम मुश्ताक पुत्र अबरार हुसैन है। वह बेरोजगारों को ठगने के लिए उन्हें अपना नाम सुरेंद्र ठाकुर बताता था। कैंट क्षेत्र में घूमकर लोगों को नौकरी के नाम पर झांसे में लेता और ठगी करता था।
पहले भी पकड़े ठग, पुलिस नहीं कर सकी कार्रवाई
कैंट क्षेत्र में अक्सर ऐसे शातिर ठग घूमते हैं जो सेना में नौकरी लगवाने का झांसा देकर बेरोजगारों को अपना शिकार बनाते हैं। पिछली साल उत्तराखंड के सितारगंज निवासी विक्की मंडल ने मेडिकल परीक्षण के लिए बरेली कैंट आए अल्मोड़ा निवासी युवकों से पास कराने और नौकरी दिलाने का झांसा देकर 11 लाख रुपये की ठगी की थी।
सेना इंटेलिजेंस ने पीड़ितों की शिकायत पर बड़ी मुश्किल से विक्की मंडल को पकड़ा था। कैंट थाने में मुकदमा भी दर्ज किया गया था लेकिन एक दरोगा ने विक्की मंडल को थाने से जमानत देकर मामला निपटा दिया। बेरोजगारों ने गंभीर आरोप लगाए तो एसएसपी ने सीओ टू को जांच भी सौंपी थी। सूत्र बताते हैं कि गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने बताया कि सेना इंटेलिजेंस की सूचना पर कैंट पुलिस ने कार्रवाई कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है जो बेरोजगार युवक से सेना की कैंटीन में नौकरी के नाम पर ठगी कर रहा था। अगर और भी पीड़ितों के नाम सामने आएंगे तो विवेचना में शामिल कर कार्रवाई कराई जाएगी। आरोपी को जेल भेजा जाएगा।