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Bareilly News: अंधता निवारण की धुंधली तस्वीर, निजी संस्थाओं से पिछड़ी सरकारी कवायद

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बरेली। राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम में स्वयंसेवी संगठनों का प्रयास सरकारी कवायद पर भारी पड़ रहा है। समान लक्ष्य के सापेक्ष स्वास्थ्य विभाग ने 269 जबकि संगठनों ने 1,646 ऑपरेशन कराए हैं। सरकारी क्षेत्र की औसत उपलब्धि भी कम है।
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रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में मोतियाबिंद ऑपरेशन और इंट्राऑकुलर लेंस (आईओएल) का लक्ष्य 66,334 रखा गया। जून तक 10,076 ऑपरेशन हुए। यानी लक्ष्य के सापेक्ष महज 15.19% उपलब्धि रही। राजकीय/स्वयंसेवी संस्थाओं को मिले एक समान (13,267) लक्ष्य के सापेक्ष उपलब्धि 2.03/12.41 फीसदी रही।
निजी क्षेत्र ने 39,800 के सापेक्ष 8,161 ऑपरेशन (20.51%) कराए। स्कूलों में आई स्क्रीनिंग, चश्मा वितरण योजना भी लक्ष्य से पीछे है। वार्षिक 5,074 लक्ष्य के सापेक्ष चार सौ बच्चों को ही चश्मे मिले। वित्त वर्ष 2025-26 में जून तक मोतियाबिंद ऑपरेशन और आईओएल के लिए 20,142 का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष 11,336 ऑपरेशन (56%) हुए थे। इस साल जून तक उपलब्धि 15.19% पर ही टिकी है।
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22 सौ से अधिक लक्ष्य, 279 बुजुर्गों को मिले चश्मे
2,237 बुजुर्गों को चश्मा दिए जाने का लक्ष्य था। जून तक 279 बुजुर्गों को चश्मे बांटे गए, जो लक्ष्य का 12 फीसदी है। नोडल अफसर डॉ. पवन कपाही के मुताबिक, मोतियाबिंद ऑपरेशन के साथ ही स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की दृष्टि सुधार से जुड़ी योजनाओं में भी तेजी लाने की जरूरत है। इसके लिए सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने सभी टीमों को स्क्रीनिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। नियमित समीक्षा हो रही है।

जानिए, क्या है योजना
प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की ओर से राष्ट्रीय अंधता एवं दृष्टि हानि नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीसीबीवीआई) संचालित है। इसके तहत स्कूलों में स्क्रीनिंग से विद्यार्थियों में दृष्टि दोष की पहचान कर उनको मुफ्त चश्मा दिया जाता है। 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के आंखों की जांच सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर करवाकर ऑपरेशन कराया जाता है या चश्मा दिया जाता है।
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