बरेली। ग्रीनपार्क कॉलोनी के बाद सिविल लाइंस में सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने का मामला सामने आया है। अफसरों से मिलीभगत कर अरबों रुपये कीमत की सरकारी जमीन पर कामर्शियल और आवासीय भवन खड़े कर लिए गए। प्रदेश शासन ने इसकी दुबारा जांच कराने के निर्देश एसपी विजिलेंस को दिए है।
स्टेशन रोड पर 166 सिविल लाइंस की 15619 वर्गमीटर जमीन सीलिंग की है। सूत्रों के मुताबिक पहले यह जमीन 52 सिविल लाइंस में रहने वाले गोकुल चंद्र, उनके भाई जगदीश चंद्र, केशव चंद्र की थी। वर्ष 1977 में सीलिंग एक्ट के तहत 15619 वर्गमीटर जमीन सरकार ने ले ली। पता लगने पर 1978 में गोकुल चंद्र, जगदीश व केशव ने जिला जज के कोर्ट में याचिका दायर की। मगर 1984 में जिला जज कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। फिर गोकुल चंद्र और उनके भाइयों की ओर से किसी भी उच्च कोर्ट में याचिका दायर नहीं की गई। उधर, नगर भूमि (अधिकतम सीमा एवं विनियमन) अधिनियम 1976 की धारा 10 (1) के अंतर्गत 1978 में राज्य सरकार ने जमीन का गजट जारी कर दिया। बावजूद इसके नगर भूमि सीमारोपण अधिकारी कार्यालय ने इस अतिरिक्त 15619 वर्गमीटर जमीन को अपने कब्जे में नहीं लिया। वर्ष1984 से 1988 के बीच इस सरकारी जमीन पर अवैध रूप से करीब 40 भवन बन गए।
शासन ने इसका संज्ञान लेकर मामले की जांच विजिलेंस को सौंप दी। मगर तत्कालीन एसपी विजिलेंस शिव सागर सिंह ने शासन को भेजी जांच में किसी को दोषी नहीं ठहराया और 2009 में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इसमें तर्क 1999 में सीलिंग एक्ट खत्म होने का दिया गया। मगर शासन ने एसपी शिव सागर सिंह की जांच रिपोर्ट स्वीकार नहीं की। शासन का कहना है कि यह प्रकरण 1977 से चल रहा है जबकि सीलिंग एक्ट 1999 में खत्म हुआ था। अब प्रमुख सचिव अनिल कुमार गुप्ता ने इस मामले की दुबारा खुली जांच कराने के निर्देश एसपी विजिलेंस राजेंद्र सिंह को दिए है। जांच शुरू भी हो गई है। एसपी विजिलेंस ने इसकी पुष्टि तो की है लेकिन कुछ भी बताने से इनकार किया है।
---
फंसेंगे कई विभागों के अफसर
इसमें नगर भूमि सीमारोपण अधिकारी, बरेली विकास प्राधिकरण, रजिस्ट्री दफ्तर, नगर निगम, बिजली विभाग समेत तमाम विभागों के अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है। घपले में शुरू से अब तक के अधिकारियों को जिम्मेदार माना जा सकता है। विजिलेंस एसपी की तरफ से संबंधित विभागों को पत्र भेज दिया गया है।
-----
मुश्किल होगा निष्पक्ष जांच करना
स्टेशन रोड पर 166 सिविल लाइंस स्वर्ण टॉवर होटल के सामने से बड़े डाकखाने को जाने वाली गली के सामने तक है। यहां कई बड़े होटल, प्राइवेट अस्पताल, मेडिकल स्टोर समेत दर्जनों दुकानेें और व्यवसायी, नेताओं और रिटायर अधिकारियों के मकान बने हैं। अधिकांश कब्जेदार रसूखदार होने से विजिलेंस को निष्पक्ष जांच करना आसान नहीं होगा।