बरेली। त्रिवटीनाथ मंदिर कमेटी की ओर से त्रिवटीनाथ मंदिर परिसर स्थित रामालय में बुधवार को मानस कथा ज्ञान यज्ञ ‘श्रीरामचरितमानस’ कथा का शुभारंभ हुआ। पहले दिन कथाव्यास पं. उमाशंकर व्यास ने बताया कि श्रीरामचरितमानस कथा श्रवण मात्र से प्राणियों में भगवान राम जैसी मर्यादा का समावेश शुरू हो जाता है।
उन्होंने कहा, रामचरित मानस के पठन पाठन से प्राणियों में नम्रता, भक्ति और प्रेम जागृत होता है। भक्त भरत और हनुमान की यात्रा का वर्णन करते हुए बताया कि दोनों श्री राम के भक्त रहे और उनका लक्ष्य भगवत प्राप्ति था। लेकिन दोनों में अंतर भी था। भरत समाज को लेकर आगे बढ़े, जबकि हनुमान समूह के साथ बढ़े और अकेले श्री राम के पास पहुंचे। उन्होंने लंका को मोह की नगरी बताया। कहा, लंका सिर्फ हनुमान ही पहुंच सकते थे। क्योंकि उनमें मोह, माया का आकर्षण नहीं था। कथा विश्राम से पहले आरती और प्रसाद वितरित हुआ। इस दौरान प्रताप चंद सेठ, हरिओम अग्रवाल, संजीव औतार अग्रवाल आदि मौजूद रहे।