भ्रष्टाचार में गर्दन फंसी तो बरेली कॉलेज मैनेजमेंट में खलबली मच गई। सोमवार को पूरे दिन कॉलेज में यह बात जोर पकड़ती रही कि एफआईआर किस पर दर्ज होगी। मैनेजमेंट के कुछ लोग भी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी (आरएचईओ) से मिले और अपने बचाव की बात रखी। वहीं आरएचईओ ने जांच समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर कार्रवाई से पहले रिटायर जज से लीगल एडवाइज लेने का निर्णय लिया।
कमिश्नर द्वारा कराई गई जांच में बरेली कॉलेज में भ्रष्टाचार की पोल खुल चुकी है। करोड़ों के काम बिना टेंडर कराए गए हैं। कमिश्नर ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश आरएचईओ को दिए हैं। आरएचईओ इस दुविधा में हैं कि कार्रवाई प्राचार्य पर की जाए या प्रबंधन पर। उन्होंने सोमवार को जांच समिति के सदस्यों के साथ बैठक की। मंथन के बाद तय हुआ कि लीगल एडवाइज ली जाए। उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए। सबसे ज्यादा गड़बड़ियां निर्माण कार्यों में सामर्ने आइं। सोमवार को बिल्डिंग कमेटी के कुछ लोग कॉलेज पहुंचे। दस्तावेज निकलवाए। बाद में आरएचईओ से मिले। वहीं प्रबंध समिति के सचिव ने भी आरएचईओ से बात की।
जांच समिति के सदस्यों के साथ बैठक की है। कार्रवाई से पहले रिटायर जज से लीगल एडवाइज लेने का फैसला हुआ है। उसके बाद ही एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. राजेश प्रकाश, आरएचईओ
प्रबंध समिति की अनुमति से ही कॉलेज में सारे कार्य हुए हैं। कोई भी कार्य बिना टेंडर नहीं हुआ। जो भी कार्य हुए उसके दस्तावेज भी मौजूद हैं। प्रशासन की तरफ से कार्रवाई का कोई भी पत्र मुझे नहीं मिला है।
-देव मूर्ति, सचिव प्रबंध समिति