पुणे में एक लैब से शुरू हुआ था आईवीआरआई
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान 1889 में पुणे में इंपीरियल बैक्टीरियोलॉजिकल लैब के रूप में शुरू हुआ था। पशुओं को रिंडरपेस्ट महामारी से निजात दिलाने में संस्थान का अहम योगदान रहा। कुलपति डॉ. त्रिवेणी दत्त के मुताबिक संस्थान में 71 नए डिप्लोमा, ट्रेनिंग, सर्टिफिकेट, डिग्री कोर्स शुरू किए हैं। इसे ग्लोबल यूनिवर्सिटी बनाने का प्रयास है।
संस्थान की उपलब्धियां
- रिंडरपेस्ट बीमारी का उन्मूलन, एफएमडी वैक्सीन का विकास।
- पशुओं की टूटी हड्डी जोड़ने की तकनीक का विकास।
- फ्रैक्चर के इलाज के लिए स्टेम सेल चिकित्सा पद्धति का प्रयोग।
- उन्नत बोन फिक्सेटर तकनीक, लंपी डिजीज की वैक्सीन व अन्य।
इतिहास
1889 - इम्पीरियल बैक्टीरियोलॉजिकल लेबोरेटरी (आईबीएल) पुणे में स्थापित।
1893 - आईबीएल लैब मुक्तेश्वर कुमाऊं हिल्स उत्तराखंड में शिफ्ट।
1913 - आईवीआरआई की स्थापना इज्जतनगर बरेली में।
1940 - पॉल्ट्री में रानी खेत बीमारी रोकने के लिए पहली वैक्सीन बनी।
1947 - निदेशालय मुक्तेश्वर से आईवीआरआई इज्जतनगर में शिफ्ट।
1971 - आईवीआरआई के बेंगलुरू परिसर की स्थापना।