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Shahjahanpur Accident: हे ईश्वर ! ये कैसा सितम... 13 लोगों की मौत से सुनौरा में आंसुओं का सैलाब

Sun, 16 Apr 2023 11:42 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर

सार

शाहजहांपुर में शनिवार दोपहर तिलहर निगोही मार्ग पर बिरसिंगपुर गांव के पास ओवरटेक करने के चलते एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पुल की रेलिंग तोड़कर नीचे जा गिरी थी। हादसे में एक ही गांव के 13 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। 
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शाहजहांपुर हादसा: रोते बिलखते मृतकों के परिजन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शाहजहांपुर के तिलहर थाना क्षेत्र के सुनौरा अजमतपुर गांव के लोग शनिवार की दोपहर ऐसे दर्दनाक हादसे के साक्षी बने, जिसने उन्हें अंदर तक हिला दिया। जिन लोगों की मौत हुई है, उनके घर आसपास करीब सौ मीटर के दायरे में ही हैं। दोपहर को हादसे की सूचना मिलते ही चीख-पुकार मच गई। सांत्वना देने पहुंचे लोगों के आंसू रोके न रुके।

हादसे में 13 श्रद्धालुओं की हुई थी मौत 

सुनौरा गांव के करीब 100 लोग दो ट्रैक्टर ट्रॉली में सवार होकर गर्रा नदी से जल लेने जा रहे थे। तिलहर निगोही मार्ग पर बिरसिंगपुर गांव के पास ओवरटेक करने के चलते एक ट्रैक्टर-ट्रॉली पुल की रेलिंग तोड़कर नीचे जा गिरी थी। इससे 13 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। 28 घायल हो गए। घायलों को उपचार चल रहा है। 

गांव में थी कथा की तैयारी 

सुनौरा में हर साल भागवत कथा का आयोजन ग्रामीणों के सहयोग से कराया जाता था। धार्मिक आयोजन में पूरा गांव बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। नदी से कलश में जल भरने के लिए गांव के लगभग हर परिवार से लोग जाते थे। सुबह से ग्रामीण कथा की तैयारियों में लगे हुए थे। डीसीएम में म्यूजिक सिस्टम का इंतजाम किया गया था।

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पुल से नीचे गिरी ट्रैक्टर-ट्रॉली - फोटो : अमर उजाला
लोग देवी गीतों पर नाच रहे थे। बच्चे उत्साह से भरे हुए थे। कभी तेज आवाज में बज रहे भजनों पर नाचते तो कभी दौड़कर अपने घर की महिलाओं से जल्दी चलने के लिए कहते। पूरे गांव में खुशी का माहौल था। दोपहर करीब एक बजे वे लोग जल लेने के लिए निकले थे। इससे पहले पूरे गांव का माहौल भक्ति के रंग में रंगा हुआ था। 

हादसे की खबर मिलते ही मची चीख-पुकार 

महिलाओं-बच्चों के साथ पुरुष ट्रैक्टर ट्रॉली में लदकर निकले थे। बताते हैं कि कुछ बुजुर्गों ने उन लोगों को टोका भी था। वे कह रहे थे कि ट्रॉली में इस तरह से लटककर मत जाओ। मगर भक्ति के रंग में रंगे लोग इस सामूहिक आयोजन से दूर नहीं होना चाहते थे। गांव से निकलने के करीब डेढ़ घंटे बाद जैसे ही दुखद सूचना गांव पहुंची, हर ओर चीख-पुकार मच गई।
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जिन घरों के लोगों की मौत हुई थी या घायल हुए थे, उनको सांत्वना देने के लिए ग्रामीण उमड़ पड़े। जो जैसे बैठा था, वो भागकर मौके पर पहुंचा। जिन अपनों को हंसी-खुशी घर से जाते देखा था, वे लहूलुहान पड़े थे। गांव के राघवेंद्र सिंह, आशाराम, प्रमोद आदि ने बताया कि ऐसा हादसा आज तक न सुना और न देखा। एक साथ इतनी मौतें हो जाएंगी, ये कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
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