एल्गिन-चरसड़ी बांध में कटान रुकने का नाम नहीं ले रहा है। घाघरा नदी बृहस्पतिवार भोर तक करीब 400 लंबाई में बांध को काट चुकी है। जिससे तराई के करीब आठ गांवों में पानी तेजी से घुसने लगा है। तटबंध में लगातार नदी का कटान जारी है।
उधर बाढ़ खंड के शेष तटबंध को बचाने के सभी उपाय फेल हो चुके हैं। जिससे जिम्मेदार सिर्फ टकटकी लगाए घाघरा का कहर शांत होने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों के खेतों में कटान में तेजी आई है।
घाघरा के रौद्र रूप से स्थानीय ग्रामीण सहमे हैं। पिछले तीन दिनों से जनपद के आसपास व नेपाली क्षेत्र में हो रही बारिश के चलते तराईवासियों की धुकधुकी और बढ़ रही है। बाढ़ पीड़ितों ने बताया कि उन तक सरकारी मदद भी नहीं पहुंच पा रही है। अधिकारी तक नहीं आ रहे हैं। नदी अभी भी खतरे के निशान से 21 सेमी ऊपर बह रही है।
एल्गिन चरसड़ी तटबंध की कटान लगातार जारी है। नदी पहले ही करीब 6 सौ मीटर तक बांध को काट चुकी थी। उसके बाद कटान में कुछ कमी आ गई थी लेकिन आसपास और नेपाल में हो रही बारिश के कारण नदी का जल स्तर फिर बढ़ने लगा है। जिससे कटान में भी तेजी आई है। नदी बृहस्पतिवार भोर तक बंधे में करीब 400 मीटर की कटान कर दी।
जिससे अब तक करीब एक किमी बंधा नदी में समा चुका है। जिससे तटवर्ती गांवों में पानी और तेजी से घुसने लगा है। तटबंध में अभी लगातार कटान जारी है। नदी का पानी करौनी गांव के निकट गन्ने के खेतों के तेजी से कटा रहा है। परसावल के किसान राम प्रसाद ने बताया कि उसकी करीब 15 बीघा फसल चार दिन में नदी में समा चुकी है।
इसी तरह सुरेश, निरंजन, राजनाथ, मंशाराम आदि किसानों के भी खेत घाघरा लील चुकी है। पिछले एक सप्ताह से घाघरा शांत थी लेकिन चार दिनों से हो रही बारिश से हालात फिर खराब हो रहे हैं।बेघर हुए ग्रामीणों के फसलों पर भी संकट मंडराने से उनमें हड़कंप मचा है। प्रशासन की ओर से कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
जिससे नदी की कटान और तेज होती जा रही है। वहीं बाढ़ पीड़ितों में एक बार राहत सामग्री का वितरण कर औपचारिकता निभा दी गई है। जिससे जो बाढ़ पीड़िता गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर है उनके खाने-पीने का सामान धीरे-धीरे खत्म होने लगा है। जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
तेजी से बढ़ रहा पानी
नदी का पानी रायपुर मांझा, परसावल, नैपुरा, कमियार सहित आठ गांवों में तेजी से बढ़ता जा रहा है। लेकिन ये गांव अभी पूरी तरह से खाली नहीं हुए हैं। कुछ परिवार ऐसे हैं कमर तक पानी में रास्ता तय करके सुरक्षित स्थानों पर आते जाते हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नदी के पानी में पूरी गृहस्थी का सामान समा गया है। लेकिन कई ग्रामीण अपनी गाढ़ी कमाई का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। जिससे वह अभी गांव छोड़ने को तैयार नहीं है।
बारिश का असर नदी के जलस्तर पर पड़ा है। बाढ़ खंड और तहसील प्रशासन लगातार नजर रखे हुए हैं। बांध के कटान को रोकने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों को सहायता में कोई लापरवाही नहीं हो रही है। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाअधिकारी