कोटवाधाम (बाराबंकी)। जिम्मेदारों की उदासीनता से चीनी मिल बंद होने से पहले गन्ना बेचना अब किसानों के लिए चुनौती बन गया है। 20 अप्रैल से मिल बंद होने की सूचना ने गन्ना किसानों की परेशानी भी बढ़ा दी है। गन्ना किसानों को बचा गन्ना मिल भेजने के लिए विभाग के कर्मचारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वहीं गन्ना सेंटर पर मिल तक गन्ना ले जाने के वाहन न होने सेंटरों पर भी जाम की स्थित बनी हुई है। इसके बावजूद जिम्मेदार परेशान किसानों को कोई राहत नहीं पहुंचा रहे हैं। जबकि 20 अप्रैल से मिल बंद होने की सूचना जारी हो चुकी है।
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में रकबा के हिसाब से गन्ना सेंटर बनाये जाते है। जिन पर गांव वार गन्ना की तौल की जाती है और सर्वे कर किसानों को समिति द्वारा पर्ची मुहैया कराई जाती है। मगर इस बार पूरा गन्ना पेराई सत्र खत्म होने को है। लेकिन किसान समय पर गन्ने का सरकारी मूल्य पाने के लिए दौड़ लगाने को विवश बने हैं। तहसील क्षेत्र में अभी भी 50 हजार क्विंटल गन्ना लगा है। इसमें अमरा सेंटर पर करीब आठ हजार क्विंटल मरौचा में 10 हजार क्विंटल गन्ना और शेखपुर, गिदरापुर, कोटवाधाम, बदोसराय, सनावा, बरौलिया सेंटर पर 35 हजार क्विंटल से ज्यादा गन्ना बचा है। इसको समय पर मिल भेजना कर्मचारियों के सामने चुनौती है। सहायक गन्ना प्रबंधक त्रिलोकीनाथ तिवारी ने बताया कि गन्ना समय से मिल को भेजने के लिए अलग से टीम लगी हुई है। किसानाें का गन्ना समय पर पहुंचे इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।