बाराबंकी। प्रदेश सरकार ने अब 30 नवंबर तक गड्ढामुक्त अभियान की समय सीमा बढ़ा दी है लेकिन इसके बाद भी जिले की सड़कों पर दिख रहे जानलेवा गड्ढों की समस्या दूर नहीं हो सकेगी। क्योंकि लोक निर्माण विभाग लाखों रुपये खर्च कर सिर्फ सड़कों में पैचवर्क कर अभियान को पूरा करने में लगा है। ऐसे में गहरे गड्ढों पर गुजर रहे वाहनों के अनियंत्रित होने के डर से राहगीर परेशान हैं।
बीते 15 सितंबर से शुरू हुए गड्ढा मुक्त अभियान को लेकर लोक निर्माण विभाग के तीनों खंडों द्वारा 1200 किमी. सड़कों को सही करने का लक्ष्य रखा गया था। बृहस्पतिवार को समय सीमा बीतने बाद भले ही 15 दिनों की समय सीमा बढ़ी हो लेकिन इसके बाद भी जिले की सड़कें गड्ढामुक्त होती नहीं दिख रही हैं। विभाग सिर्फ पैचवर्क के जरिए छोटे-छोटे गड्ढों को भरकर अभियान को सच करने में लगा है।
उदाहरण के तौर पर सतरिख-चिनहट मार्ग के बीच 10 किलोमीटर की दूरी में 13 जानलेवा गड्ढे हैं। जिनकी वजह से यहां कभी भी वाहनों के अनियंत्रित होने से हादसा हो सकता है। वैसे सतरिख से चिनहट तक 18 किलोमीटर. लंबा यह मार्ग पूरी तरह से जर्जर है। पीडब्लूडी प्रांतीय खंड के एक्सईएन आरके राम ने बताया कि बढ़ी समय सीमा के अंदर सड़कों को सही करा लिया जाएगा।
सतरिख-चिनहट मार्ग पर थाना चौराहे के पास दिख रहा यह गड्ढा राहगीरों के लिए परेशानी का सबब है। जर्जर सड़क के दोनों ओर फैला जंगल आग में घी डालने का काम कर रहा है। वहीं इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों का चिनहट लखनऊ के लिए आवागमन होता है।
इस मार्ग पर ग्राम सकरी के निकट रेठ घदी पुल के पास तीव्र मोड़ राहगीरों के जान पर आफत बना है। गड्ढायुक्त इस सड़क पर पहले कई बार हादसा भी हो चुका है। डामर पूरी तरह से गायब है। राजधानी को जोड़ने वाले इस मार्ग पर वाहनों के आवागमन से अक्सर हादसे का रहता हैं।
आगे बढ़ने पर जफरपुर गांव के मुर्रा नाले के पास दिख रही सड़क की हालत और गड्ढे से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसकी मरम्मत कई सालों से नहीं हुई। आसपास एक नहीं कई गड्ढे दिख रहे हैं। रात्रि में इस मार्ग से आना खतरे से खाली नहीं है। 2015 में इस मार्ग का निर्माण हुआ था।
इस मार्ग पर कमरपुर फरेंदी गांव के पास जानलेवा गड्ढा यह बता रहा है कि नई सड़क तो दूर कई सालों से इसकी मरम्मत तक नहीं कराई गई है। ऊपर से वाहनों के आवागमन से उड़ती धूल बाइक सवार और पैदल चलने वालों के लिए मुसीबत पैदा कर रही है।