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रेलवे ने खोदवा दिया रास्ता, दस हजार की आबादी प्रभावित

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सफेदाबाद (बाराबंकी)। रेलवे अपनी नाकामियां छुपाने के लिए ग्रामीणों पर अत्याचार करने लगा है। मामला लखनऊ-अयोध्या रेलखंड के सफेदाबाद स्टेशन के पास बसे कई गांवों का है। यहां क्रॉसिंग के पास से निकले रास्ते को रेलवे ने खोदवा दिया है। जिससे लोगों का आवागमन बंद हो गया है।
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डल्लू खेड़ा, भोजपुर, जरूवा, भिटौली, काशीपुरवा और परेठिया गांव के हजारों ग्रामीण परेठिया गांव की रेलवे क्रॉसिंग पार कर हाईवे तक पहुंचते हैं। कुछ दिन पहले क्रॉसिंग से गेटमैन हटाकर फाटक बंद कर दिया गया और इसको मानवरहित दिखा दिया गया। सोमवार की शाम रेलवे के दर्जनों कर्मी जेसीबी लेकर क्रॉसिंग के पास पहुंचे और मुख्य मार्ग को खोदना शुरू कर दिया। यही नहीं उन्होंने हाईवे से गांव को जोड़ने वाले खड़ंजे और लिंक मार्ग को खोदकर दस फीट गहरा गड्ढा बना दिया।
जब ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू किया तो उन्होंने बताया कि ऊपर से आदेश है कि आगामी 28 अगस्त को राष्ट्रपति अयोध्या ट्रेन से रामलला के दर्शन को जा रहे है। इसलिए सभी मानवरहित क्रॉसिंग को खोदकर बंद किया जा रहा है। ताकि उनको कोई असुविधा न हो। राष्ट्रपति की यह यात्रा हजारों ग्रामीणों के लिए आफत बन गयी है।
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अब वाहन तो दूर वह पैदल भी गांव के बाहर नहीं निकल सकते। अब आधा दर्जन से अधिक गांव के करीब दस हजार ग्रामीण अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं और राष्ट्रपति की इस यात्रा को अपने लिए मुसीबत बता रहे हैं। ग्रामीणों ने केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र भेजकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
मोबाइल के उजाले में सही कराया जा रहा रेलपथ
सफेदाबाद। रेलवे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की सुरक्षित अयोध्या यात्रा के प्रति संवेदनशील नहीं है। जिन पुरानी पटरियों को बदलकर नई पटरियां लगाई गई थी उनको स्थायी रूप से जोड़ा नहीं जा सका है। अब जब राष्ट्रपति की अयोध्या दौरा निश्चित हुआ तो इन पटरियों को जोड़ने का काम शुरू किया गया। वह भी मोबाइल की रोशनी में।
मामला बाराबंकी स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक का है। सूत्रों ने बताया कि कई माह पहले जर्जर हो चुकी पुरानी पटरियां बदलकर नई लगाई गई थीं। उनको सिर्फ फिश प्लेट के सहारे अस्थाई रूप से जोड़ दिया गया था। इन्हीं पटरियों पर यात्रियों की जान जोखिम में डालकर ट्रेनें गुजारी जा रही थीं। लेकिन जैसे ही विभाग को यह सूचना मिली कि राष्ट्रपति का अयोध्या जाने का कार्यक्रम है, अधिकारियों ने आननफानन में इन अस्थाई जोड़ों की स्थायी मरम्मत कराना शुरू किया।
सभी फिश प्लेटों को खोलकर पटरियों की वेल्डिंग करानी शुरू कर दी। इस कार्य के लिए अधिकारी, रेल कर्मियों को बगैर संसाधन दिए ही जुटा दिया है। रात में मोबाइल की रोशनी में रेल कर्मियों को पटरियां जोड़ने का फरमान सुना दिया गया। इसके लिए कोई बिजली की व्यवस्था भी नहीं कराई गई।
कर्मियों का आरोप है कि अंधेरे में न तो मरम्मत का कार्य सही से हो पाता है और न ही पटरियां सही से जुड़ पाती है। अधिकारियों की यह लापरवाही राष्ट्रपति की सुरक्षा के साथ तो खिलवाड़ है ही, साथ में कर्मियों की भी जान जोखिम में डालने वाली है।
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