बाराबंकी। कागजी गरीब बन धान गेहूं बेचने वाले 1003 लोगों के राशनकार्ड जांच के बाद भले ही निरस्त करने का दावा किया जा रहा है। परंतु यदि अन्त्योदय और पात्र गृहस्थी के राशनकार्डों की सही से जांच करा ली जाए तो बड़ेे पैमाने पर फर्जीवाड़ा पकड़ में आ सकता है। कई अपात्र ऐसे हैं जिनके राशनकार्ड बने हैं और वह योजना का लाभ भी ले रहे हैं। जबकि वास्तविक पात्र योजना का लाभ पाने के लिए धक्के खा रहे हैैैं।
शासन द्वारा कराई गई जांच में 1022 किसान ऐसे पाए गए जिन्होंने तीन लाख से अधिक का धान और गेहूं सरकारी केंद्रों पर बेचा है। इसकी सूची डीएसओ को भेजी गई। डीएसओ द्वारा कराई गई जांच में पाया गया कि 1003 किसान ऐसे हैं जिन्होंने तीन लाख से अधिक का धान व गेहूं बेचा है और चार किसान पात्र और 15 नाम ऐसे पाए गए जो जिले के रहने वाले ही नहीं।
विभाग का दावा है कि इन कार्डों को निरस्त करते हुए पूरी जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जबकि हकीकत में यदि अन्त्योदय और पात्र गृहस्थी के कार्डों की सही से जांच कराई जाए तो इन लोगों ने धान और गेहूं भले ही सरकारी केंद्रों पर न बेचा हो पर कई ऐसे अपात्र जरूर मिल जाएंगे जो अपात्र होने के बावजूद योजना का लाभ ले रहे हैं। जबकि पात्रता की श्रेणी में आने वाले वास्तविक पात्र योजना का लाभ पाने के लिए धक्के खा रहे हैं और उनके राशनकार्ड नहीं बन पा रहे हैं।
डीएसओ राकेश कुमार तिवारी ने बताया कि शासन द्वारा 1022 किसानों की जो सूची भेजी गई थी उसकी जांच में 1003 किसान अपात्र पाए गए हैं। इनके राशनकार्ड निरस्त करते हुए पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। राशनकार्डों की जांच के लिए समय-समय पर अभियान जरूर चलाया जाता है।