बाराबंकी। बाराबंकी से गोरखपुर के बीच रेलवे द्वारा ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे ट्रेनों के आवागमन में काफी आसानी होने के साथ ही यात्रियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेगी। जिले से गोरखपुर की दूरी करीब 244 किलोमीटर है। यहां से प्रतिदिन लगभग 45 यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है। इन सिग्नल के लगने से ट्रेनों को बेवजह किसी स्टेशन या फिर रेल ट्रैक पर रुकना नहीं पड़ेगा।
रेलवे में सिग्नल सिस्टम को अब ऑटोमेटिक सिस्टम में बदलने की तैयारी तेज कर दी गई है। अभी तक एबसेल्यूट सिग्नल सिस्टम से ट्रेनों का संचालन कराया जा रहा है। ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम लगने से ट्रेनों को बेवजह कहीं भी खड़ी नहीं होना पड़ेगा। इसके चलते एक ही रूट पर एक के पीछे एक ट्रेन बिना लेट हुए आसानी से चल सकेगी।
इन सिग्नल से रेल लाइनों पर ट्रेनों की रफ्तार के साथ ही संख्या भी बढ़ सकेगी। वहीं कहीं भी खड़ी ट्रेन को निकलने के लिए आगे चल रही ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने का भी इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्टेशन यार्ड से ट्रेन के आगे बढ़ते ही ग्रीन सिग्नल मिल जाएगा। यानी एक ब्लॉक सेक्शन में एक के पीछे दूसरी ट्रेन आसानी से चल सकेगी।
पहले फेज में 272 किमी. के दायरे में लगेंगे सिग्नल
रेलवे के अफसरों की माने तो पहले फेज में यह सिग्नल करीब 272 किलोमीटर के दायरे में लगेंगे। इसके लिए बाराबंकी से गोंडा, बस्ती व गोरखपुर के बीच की रेल लाइन को चुना गया है। दूसरे चरण में गोरखपुर से भटनी-छपरा रूट पर यह सिग्नल लगाए जाएंगे। लखनऊ-गोरखपुर रूट पर नए सिग्नल सिस्टम लगाने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे ने यह प्रक्रिया तेज कर दी है।
एक किलोमीटर की दूरी पर लगेंगे सिग्नल
यह सिग्नल रेल लाइन पर पुराने सिग्नल से आगे प्रत्येक एक किलोमीटर की दूरी पर लगाए जाएंगे। ऐसे में यदि कभी आगे वाले सिग्नल में कोई कमी आती है तो पीछे चल रही ट्रेन के चालक को इस बारे में पता जाएगा। ऐसे में जो ट्रेन जहां होगी उसको वहां पर रोक दिया जाएगा।
इससे ट्रेन लेट भी नहीं होगी। अभी तक जो सिग्नल लगे हैं उससे एक ट्रेन को अगले स्टेशन से निकालने के बाद ही दूसरे ट्रेन को निकाला जाता है। लेकिन इस व्यवस्था से यह समस्या दूर हो सकेेगी।
रेलवे के नए सिग्नल व्यवस्था से ट्रेनों के संचालन में बहुत मदद मिलेगी। इसके साथ ही यात्रियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। विभाग द्वारा ऑटोमेटिक सिग्नल लगाने की कवायद की जा रही है।
-वीके शुक्ला, स्टेशन अधीक्षक, बाराबंकी