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बागी बिगाड़ेंगे सपा व भाजपा की चुनावी गणित

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बाराबंकी। मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ ही बगावत के सुर मुखर होने लगे हैं। बागी हो चुके कई पूर्व नेता भाजपा और सपा का चुनावी गणित बिगाड़ सकते हैं। इन पार्टियों के सामने बगावत को रोकना किसी चुनौती से कम नहीं है। भाजपा का झंडा बुलंद करने वाले एक पूर्व मंत्री जहां सपा के पाले में जा चुके हैं वहीं टिकट कटने से नाराज भाजपा के एक विधायक ने गृहमंत्री को पत्र लिखकर मीडिया के सामने अपना दर्द बयां कर दिया है।
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उससे पार्टी में खलबली है। वहीं सपा के कद्दावर नेता व पूर्व मंत्री के पुत्र ने निर्दलीय नामांकन कर बगावत को हवा दे दी है। इसके अलावा दोनों दलों में सैकड़ों समर्थकों के साथ टिकट मांग रहे दावेदार कहां हैं और उनकी भूमिका क्या गुल खिलाएगी यह भी आंकने के लिए सपा व भाजपा के नेता जुट गए हैं।
चुनाव में जीत का दावा करने वाली राजनीतिक पार्टियों की राह में अपने ही रोड़ा अटकाने लगे हैं। समाजवादी पार्टी में मंत्री रहे स्व. राजा राजीव कुमार सिंह के निधन के बाद उनके पुत्र राजा रीतेश कुमार सिंह रिंकू ने निर्दलीय उम्मीदवार को रूप में नामांकन पत्र दाखिल कर अपने बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं।
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बीजेपी में रहे पूर्व मंत्री संग्राम सिंह वर्मा अपनी बेटी के लिए कुर्सी क्षेत्र से टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने उनको तवज्जो नहीं दी। इसके बाद उन्होंने अपने भाई पूर्व प्रमुख सुरेंद्र सिंह वर्मा, बहू दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रही शीला सिंह व अन्य कार्यकर्ताओं के साथ सपा का दामन थाम लिया है। संग्राम की पकड़ कुर्मी बिरादरी में अच्छी बताई जाती है।
जिले में इस बिरादरी की संख्या खासी है जिससे इनका असर सभी सीटों पर पड़ेगा। बीजेपी से हैदरगढ़ के विधायक बैजनाथ रावत का टिकट कटने से वह भी बगावत की राह पर चले पड़े हैं। गृहमंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में उन्होंने अपनी मंशा साफ कर दी है। नेताओं के बगावत पर उतर आने के बाद सपा और भाजपा को इसका नुकसान होना तय है। वहीं पार्टी नेताओं के सामने इस बगावत को रोकना किसी चुनौती से कम नहीं है। (संवाद)
टिकट नहीं मिला तो गायब हो गए दावेदार
अभी तक विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी करने वाले तमाम चेहरे इस समय गायब हो गए हैं। कुर्सी से जहां सपा में 29 लोग दावेेदार थे वहीं बीजेपी में भी 30 लोग दावा कर रहे थे। दरियाबाद से भी सपा में 15 तो बीजेपी में करीब 10 लोग टिकट मांग रहे थे।
इसी तरह जैदपुर व हैदरगढ़ में भी टिकट मांगने वालों की संख्या दोनों दलों में पांच-पांच से अधिक थी। जबकि रामनगर व बाराबंकी सीट पर भी दो से तीन लोग टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे। टिकट फाइनल न होने तक लग्जरी वाहनों का काफिला लेकर चलने वाले यह लोग पार्टी के चुनाव प्रचार में भी नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में इनसे निपटना भी पार्टियों के लिए आसान नहीं होगा।
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