बाराबंकी। यात्रियों को कम समय में सुरक्षित सफर की सुविधा देने के लिए टोल टैक्स के नाम पर भले ही मोटी रकम वसूली जाती हो पर सुविधाएं सिर्फ कागजों पर दी जा रही है। रामसनेहीघाट में हादसे के बाद एनएचएआई की भूमिका लापरवाही की पाई गई है।
पांच घंटे तक बस खराब खड़ी रही, मगर एनएचएआई का कोई वाहन नहीं पहुंचा। इससे साबित हो गया कि 80 किलोमीटर के बीच में दो पेट्रोलिंग और दो एंबुलेंस सिर्फ कागजों पर दौड़ रही हैं। हाईवे पर कहां-कहां ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं, अफसरों को इसकी जानकारी तक नहीं है।
अयोध्या-लखनऊ हाईवे में करीब 60 किलोमीटर का एरिया जिले में आता है। एनएचएआई की एक टीम को लखनऊ के कमता से लेकर रौनाही तक करीब 80 किलोमीटर के दायरे में सुविधाएं मुहैया कराने के जिम्मेदारी है। इन्हें प्रमुुखता के साथ सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और आपातकाल में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए दो-दो वाहन लगाए गए हैं।
सर्विस लेन को अतिक्रमण मुक्त रखने के साथ ही सड़क के किनारे साफ-सफाई से लेकर अनेक जिम्मेदारी होती है। पर यह सुविधाएं हाईवे पर कहीं दिखाई नहीं पड़ती। रामसनेहीघाट में 18 लोगों की मौत के बाद इनकी लापरवाही सामने आ गई है।
पांच घंटे तक डबल डेकर बस रामसनेहीघाट के कल्याणी नदी के किनारे हाईवे पर एक्सल टूटने के चलते खड़ी रही, लेकिन एनएचएआई के पेट्रोलिंग वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। अयोध्या के अलावा जिले में 119 किलोमीटर सुल्तानपुर हाईवे पर तीन एंबुुलेंस और दो पेट्रोलिंग वाहन हैं। यहां पर भी रात में कोई वाहन पेट्रोलिंग करते नहीं दिखता है। बहराइच हाईवे पर भी टोल तो है पर सुविधा के नाम पर सिफर है।
क्या-क्या देनी होती हैं सुविधाएं
उधौली टोल प्लाजा के मैनेजर एसएन चौहान ने बताया कि यात्रियों के पीने के लिए पानी, सुलभ शौचालय, क्रेन, एंबुलेंस व पेट्रोलिंग की सुविधा दी जानी है। एक कॉरिडोर 80 किलोमीटर तक है। जिसके इंचार्ज गुंजन कुमार सिंह हैं।
हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर एंबुलेंस भेजी गई थी, जबकि पेट्रोलिंग टीम दूसरे स्थान पर खराब वाहन को हटाने गई थी। ब्लैक स्पॉट के पांच-छह स्थान चिह्नित हैं। एक दो स्थान को छोड़ नाम याद नहीं है।
-गुंजन कुमार, पेट्रोलिंग ऑफिसर, एनएचएआई