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कमरू हत्याकांड में 10 अभियुक्तों को उम्रकैद

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बाराबंकी। जैदपुर के बहुचर्चित कमरू हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश कमलकांत श्रीवास्तव ने बुधवार को नामजद 10 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी पर अलग-अलग धाराओं में 61 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
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अभियोजन का पक्ष बताते हुए शासकीय अधिवक्ता मथुरा प्रसाद वर्मा और अमित अवस्थी ने बताया कि घटना 5 मार्च 2015 की है। शाम 7:30 को मृतक कमरुद्दीनपुर उर्फ कमरू निवासी टिकरा मुर्तुजा थाना जैदपुर अपनी पत्नी बुशरा व डेढ़ साल के बच्चे के साथ बाइक से ससुराल से वापस अपने घर आ रहा था। मृतक कमरू की ससुराल गांव में ही थी।
गांव में ही पुरानी मस्जिद के पास पहले से घात लगाकर बैठे अभियुक्त इजहार, सिराज, मोहम्मद अहमद उर्फ मम्मन, एहतेशाम, इमरान, मोफीत, मोहम्मद जैद, इशराक, रिजवान और मोहम्मद इसरार द्वारा कमरू को आते देख रोक लिया और भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए उसको चाकू, छुरी और तमंचे से कई वार कर बुरी तरह घायल कर दिया। इसी बीच उसकी पत्नी अपने दुधमुंहे बच्चे को छोड़कर चिल्लाते हुए कमरू को बचाने के लिए उसके ऊपर लेट गई। अभियुक्त गणों ने उसे मारापीटा और खींचकर अलग कर दिया। तब उसने फिर शोर मचाया।
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उसकी आवाज सुनकर गांव के ही अंसार और कुछ अन्य लोग दौड़ करके आए लेकिन अभियुक्त गणों ने उन पर भी फायर कर दिया। इससे सब ठिठक गए। कोई नजदीक जाने की हिम्मत नहीं कर पाया। क्योँकि सबके हाथ में चाकू, छुरी और तमंचे थे। सरेशाम हुई इस दुस्साहसिक वारदात को देखकर आसपास के लोगों ने अपने मकान के दरवाजे बंद कर लिए और अफरातफरी के माहौल में इधर-उधर भाग गए।
कमरू को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया था। इस मामले में अज्जन उर्फ मिस्बाह उल रहमान को भी नामजद किया गया था लेकिन वह घटना के समय एक अन्य मामले में जिला जेल लखनऊ में बंद था। इसलिए उस पर दोषसिद्ध नहीं हो पाया। कोर्ट ने उसे बरी कर दिया। जबकि उपरोक्त मामले में मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद इसरार और मोहम्मद जैद को विवेचना के दौरान अपराध में संलिप्त पाए जाने पर अभियुक्त बनाया गया था।
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