बाराबंकी। नवजातों की मौत का ग्राफ रोकने के लिए जिले में पहली बार कंगारू मदर केयर की सुविधा मिलने जा रही है। जिला महिला अस्पताल की चौथी मंजिल पर बनाए गए एमएनसीयू में 15 बेडों की व्यवस्था के साथ मां व नवजात के लिए सारी सुविधाएं रहेंगी। इस यूनिट में मां और नवजात साथ-साथ रहेंगे। नवजात को प्यार, गर्माहट व पोषण तीनों चीजें मिलेंगी। यहां डायनिंग टेबल से लेकर आधुनिक स्नानागार आदि की सुविधा भी रहेगी।
दरअसल, ढाई किलो से कम वजन वाले या किसी बीमारी से पीड़ित बच्चों को एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट) में भर्ती कराया जाता है। यहां नवजात को अत्याधुनिक सुविधाओं वाली चिकित्सा सुविधा दी जाती है। मगर इस दौरान नवजात को अपनी मां से दूर रहना पड़ता है। ऐसे में एसएनसीयू में भी नवजात बच्चों की मौत हो जाती है। एसएनसीयू में नवजात की मौत का ग्राफ रोकने के लिए शासन ने जिला स्तर पर मदर एंड नियोनेटल केयर यूनिट (एमएनसीयू) की स्थापना की पहल की थी।
इसके तहत बाराबंकी महिला अस्पताल को भी चयनित किया गया था। पिछले छह माह से इस पर काम चल रहा था जो पूरा हो गया है। इस यूनिट में 15 वॉर्मर बेड हैं। इन पर प्रसव के बाद माताएं कंगारू मदर केयर की सुविधा का लाभ पाएंगी। वह न केवल नवजात को स्तनपान करा सकेंगी बल्कि उनके साथ समय भी बिता सकेंगी।
इस यूनिट में बाल रोग विशेषज्ञों के साथ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ जच्चा-बच्चा दोनों की लगातार निगरानी करेंगे। यहां ऑक्सीजन व अन्य आधुनिक मशीनें भी उपलब्ध रहेेंगी। यूनिट में मां व नवजात के इलाज के साथ उन्हें घर जैसा माहौल दिया जाएगा। डायनिंग टेबल से लेकर स्नान तक की सुविधा प्रदान की जाएगी।
क्या है कंगारू मदर केयर
जिस प्रकार मादा कंगारू अपने शरीर में प्राकृतिक रुप से बनी थैली में नवजात को सीने से लगाए रहती है ठीक उसी तरह समय से पहले जन्म लेने वाले या बीमार नवजात को यूनिट में बने विशेष कक्ष में माताएं सीने से लगाकर रखेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जन्म के बाद नवजात का मां के साथ रहना उनके लिए वरदान होता है। स्तनपान जहां प्राकृतिक टीकाकरण माना जाता हैं वहीं मां का स्पर्श नवजात के लिए एक थेरेपी होती है।
जिला महिला अस्पताल में मदर एंड नियोनेटल केयर यूनिट तैयार हो चुकी है। समय से पहले जन्म लेने वाले व कमजोर नवजात यहां रखे जाएंगे। इस जगह पर उन्हें मां का सानिध्य मिलेगा। दोनों के स्वास्थ्य की निगरानी लगातार की जाएगी। एमएलसी चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने के बाद इसका उद्घाटन किया जाएगा।
-डॉ. पीके श्रीवास्तव, अधीक्षक जिला महिला अस्पताल