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हे छठ मैया पूरी करो अरजिया हमार..

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बाराबंकी। नहाय-खाय के साथ ही पूर्वांचल के महापर्व चार दिवसीय डाला छठ की शुरुआत सोमवार से हो गई। महिलाओं ने घरों में रसोई आदि की सफाई कर स्नान पूजन किया। दिनभर व्रत रहने के बाद शाम को सादा भोजन किया। परंपरा के अनुसार दिनचर्या बदलते हुए लकड़ी के तख्त या जमीन पर शयन की शुरुआत की। शाम को महिलाओं ने छठ मैया के पारंपरिक गीत गाए। अब मंगलवार को घरों में खरना छोटी छठ मनाई जाएगी।
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डाला छठ पर्व में व्रत रखने वाले घरों में उत्सव सरीखा माहौल है। सोमवार को महिलाओं ने परंपरा के अनुसार नहाने के बाद पूजा अर्चना की, लौकी की सब्जी व चने की दाल बनाकर उसका भोग लगाया और प्रसाद ग्रहण किया।
शाम को घरों में महिलाओं ने छठ मइया के पारंपरिक गीत हे छठ मैया पूरी करो अरजिया हमार., कांचहि बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय..., कातिक मास अइले परब, हम छठ करबो ना, पटना से लइबो जोड़ा नारियर, अरघ देबो जरूर... गाए।
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छठ व्रत के दूसरे दिन घरों में खरना छोटी छठ मनेगी। इसी दिन छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद ठेकुआ बनाया जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन व्रत रहती हैं और शाम को चावल, गुड़ और गन्ने के रस से रसियाव (खीर) बनाती हैं। शाम को भगवान सूर्य की पूजा के बाद भगवान को चढ़ी खाद्य सामग्री प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं।
पूजन सामग्री के दाम आसमान पर
छठ पूजा से पहले ही पूजन के लिए पूजन सामग्री के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं। बाजार में पूजा में प्रयोग होने वाली सभी सामग्रियों के दाम में लगभग 30 फीसदी बढ़ोतरी हो गई। कच्ची हल्दी, कच्ची अदरख, कच्ची गाजर, शकरकंद, पनियाला, आंवला, अनान्नास, गागरा, सुथनी, गन्ना, सेब, संतरा के दाम बढ़ गए हैं। सोमवार को सुथनी, हरी अदरख, हरी हल्दी 80 रुपये प्रतिकिलो, साठी चावल 120 रुपये प्रति किलो बिका।
नियम से किया जाता है व्रत
महापर्व छठ का व्रत कड़े नियम से किया जाता है। अर्घ्य देते समय गन्ने का होना अनिवार्य माना जाता है। षष्ठी पर पूजा स्थल पर पूजा की मंगल कामना की जाती है। पूजा की समाप्ति के बाद अपनी इच्छाशक्ति से ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है।
- अनु गुप्ता
मनौतियाें का पर्व है छठ महापर्व
छठ पर्व को मनौतियों का पर्व कहा जाता है। इस पर्व में पूरे चार दिन शुद्ध और स्वच्छ कपड़े पहने जाते हैं। इस बात का ध्यान रखा जाता है कि कपड़ों का रंग काला न हो। जल में खड़े होकर सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है।
- सुमन राव
पूजा के लिए बनाया जाता है ठेकुआ
इस पर्व में बांस के सूप का बेहद महत्व है। पूजा के लिए जो ठेकुआ बनाया जाता है, उसे घर पर ही बनाया जाता है। घाट पर बनाई गई वेदी सुसुभिता पर ठेकुआ चढ़ाया जाता है। परिक्रमा कर पूजा अर्चना की जाती है।
- माधुरी गौतम
साफ सफाई का रखा जाता है ख्याल
व्रत के दौरान भूमि पर चटाई बिछा कर शयन किया जाता है। आज नहाय-खाय के साथ ही व्रत की शुरुआत हो गई है। व्रत का सारा सामान ठेकुआ आदि चूल्हे पर बनाया जाता है। व्रत में साफ सफाई का विशेष ख्याल रखा जाता है।
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- माया चक्रवर्ती
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