बाराबंकी। कार्तिक पूूर्णिमा पर शुक्रवार को जिले भर में भक्ति की धारा बही। सतनामी संप्रदाय का सबसे बड़ा स्थान कोटवाधाम में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ठंड के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने अभरण सरोवर में डुबकी लगाई और मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर बाबा से सुख समृद्धि की कामना की।
वहीं जिले में नदी के घाटों और सरोवरों में भी श्रद्धालुओं ने स्नान कर पूजा-अर्चना व दान-पुण्य किया। कोटवाधाम में कोरोना काल के कारण दो साल बाद लगे मेले में आसपास के जिलों के अलावा प्रदेश भर से श्रद्धालु व दुकानदार यहां पहुंचे हैं। पुलिस प्रशासन भीड़ के मद्देनजर पूरी तरह चाक चौबंद दिखा। पुलिस अधिकारी गश्त करते रहे।
प्रतिवर्ष की भांति कार्तिक पूर्णिमा पर स्वामी जगजीवन दास की तपोस्थली कोटवाधाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। भोर से ही श्रद्धालुओं ने अभरण सरोवर में बाबा के जयघोष के साथ स्नान किया और उनकी समाधि पर प्रसाद अर्पित किया। श्रद्धालुओं ने परिक्रमा की तो कई श्रद्धालुओं ने दंडवत परिक्रमा भी की। इस मौके पर लोगों ने सेल्फी भी ली।
सिद्धौर में बाबा जगजीवन दास की गद्दी से जुड़े बाबा केशरीदास जमलापुर कुंभ रावा बुआ सिंह के मंदिर में श्रद्धालुओं ने माथा टेका। इसके अलावा पहाड़पुर स्थित बाबा फलाहारी दास कुटी गोमती नदी के किनारे स्थित और गोमती नदी के कोटवा घाट पर मेला लगा।
हैदरगढ़ में औसानेश्वर घाट पर भक्तों ने गोमती में डुबकी लगाकर भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। शिवनाम के सगरा में श्रद्घालुओं ने स्नान कर सोनेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना की। त्रिवेदीगंज के पूरे देवीदास में धागाबंदी भक्तों ने बाबा की समाधि पर मत्था टेका और पूजा अर्चना की।
महंत घनश्याम दास, गुरुशरण दास आदि गुरुओं ने भक्तों की धागाबंदी की। सुबेहा में राजघाट पर भक्तों ने गोमती में डुबकी लगाई। रामसनेहीघाट में कल्याणी नदी के निकट स्थित बाबा रामसनेहीदास की तपोस्थली पर मेला लगा। सुबह से ही भक्तों ने कल्याणी नदी में स्नान कर मंदिर पर प्रसाद चढ़ाया।
तुलसी की पूजा कर मांगी सुख-समृद्धि
कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह घरों में पूजन संग आरती के स्वर गूंज उठे। महिलाओं ने तुलसी विवाह की कथा सुनी। शाम को तुलसी का शृंगार कर रंगोली व चौक बनाकर महिलाओं ने दीप जलाकर तुलसी की पूजा की और पूड़ी, हलवा, खीर व फल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। वहीं सिद्घेश्वर महादेव, धनोखर, नागेश्वर महादेव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने दीप जलाकर मंगलकामना की।
सत्यनारायण की कथा सुन की परिक्रमा
धन्नाग तीर्थ में श्रद्धालुओं ने स्नान कर सत्यनारायण कथा सुनी और धन्नागी बाबा की समाधि पर माथा टेका। भक्तों ने स्नान के बाद परिक्रमा की और पूजन अर्चन किया। धन्नाग तीर्थ महाभारत समयकालीन बताया जाता है। धन्नाग तीर्थ को धनंजय (अर्जुन) के नाम से भी जाना जाता है। इससे पूर्व कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले मेले का निंदूरा ब्लॉक प्रमुख रामू गुप्ता ने उद्घाटन किया। साहित्यकार हरिगोबिंद यादव द्वारा रचित काव्य संग्रह पर तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया।