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अवधी में लेखन कार्य और बातचीन नहीं तो मातृभाषा के प्रति नैतिक अपराध

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बाराबंकी। मातृभाषा और मातृभूमि की उपेक्षा अधोगति का कारण होती है, जबकि अपनी बोली बानी अमृत तुल्य होती है। अवध क्षेत्र में रहने वाले लोग यदि अवधी में लेखन कार्य व वार्तालाप नहीं करेंगे तो यह मातृभाषा के प्रति नैतिक अपराध होगा। अवध विश्वविद्यालय ने अवधी में डिप्लोमा कोर्स जारी किया है। जिसका पहला सत्र आरम्भ होने वाला है। अवधी भाषा को समृद्ध बनाने में श्री राम चरितमानस और गोस्वामी तुलसीदास जी का अनन्य योगदान है।
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ये बातें अवध विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने शनिवार को शहर के ऑडीटोरियम में साहित्य इतिहास शोध संदर्भ पुस्तक के विमोचन करने के मौके पर कहीं। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों ने जिले का इतिहास सहेज कर नई पीढ़ी के हाथों में सौंपने का जो पावन महत्व का कार्य किया है। यह एक ऐतिहासिक धरोहर है और सच्चे अर्थों में यह कार्य पूर्वज साहित्यकारों के लिए वास्तविक श्रद्धांजलि है।
सांसद उपेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पीएम मोदी भारतीय संस्कृति और भारतीयता की रक्षा के लिए लगातार योजनाओं का क्रियान्वयन कर रहे हैं। डॉ. वाईपी सिंह, डॉ. विद्योत्तमा मिश्रा ने भी विचार दिए। इस दौरान पूर्वज साहित्यकार जन्मभूमि दर्शन यात्राओं में शामिल 50 से अधिक साहित्यकारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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अवधी लोक गायिका पूजा पांडेय व तान्या भारद्वाज ने लोकगीत सुनाए। मौके पर डॉ. विनय दास, अजय सिंह गुरु, डॉ. श्याम सुंदर दीक्षित, डॉ. बलराम वर्मा, धीरेंद्र वर्मा, प्रदीप सांरग आदि मौजूद रहे। दूसरी ओर जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल पीजी कॉलेज के डॉ. जेपीएन सिंह स्मृति सभागार में डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति प्रो. रविशंकर का अभिनंदन एवं सम्मान समारोह हुआ।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सीताराम सिंह सहित महाविद्यालय के विभिन्न वरिष्ठ प्राध्यापकों ने अंगवस्त्र तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। अवसर पर डॉ. संजय अग्रवाल, डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, डॉ. हेमंत कुमार सिंह, डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव, डॉ. अनीता सिंह आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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