बाराबंकी। बारिश के चलते खेतों में पानी व कीचड़ होने से छुट्टा मवेशियों ने अब सड़कों पर डेरा जमा लिया है। ऐसे में राहगीरों की जान पर आफत बन आई है। वहीं जिले में जितने भी स्थाई व अस्थाई गोशालाएं हैं, उनमें क्षमता से अधिक मवेशियों को संरक्षित करने का दावा पशुपालन विभाग की ओर से किया जा रहा है। ऐसे में बाहर घूम रहे इन छुट्टा मवेशियों से निजात दिलाने के लिए न तो अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि।
जिले का शायद ही ऐसा कोई प्रमुख मार्ग हो जिस पर छुट्टे मवेशी घूमते न हों। इन दिनों हो रही बारिश से खेतों में पानी और कीचड़ होने से इन छुट्टा मवेशियों ने अब रास्ते के बीचोबीच ही डेरा डाल लिया है। यही नहीं अकसर दो सांड़ों के बीच आपसी जंग होते रहने से राहगीर सहम जाते हैं। जाम की स्थिति भी पैदा हो जाती है। यह दृश्य देेवा-फतेहपुर मार्ग पर सबसे ज्यादा देेखने को मिल रहा है।
इसी तरह अन्य कई मार्गों के बीच व किनारे दर्जनों छुट्टा मवेशी आतंक का पर्याय बने हैं लेकिन इस विकट समस्या पर न तो जिम्मेदार अधिकारी कुछ बोल रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि ही ध्यान दे रहे हैं। वहीं रविवार को नगर पालिका परिषद द्वारा शहर में छुट्टा मवेशियों को पकड़ कर गोशालाओं में बंद किया गया।
पशुपालन विभाग के अनुसार जिले में स्थाई व अस्थाई रूप से 33 गोशालाएं हैं। इनमें करीब दस हजार से अधिक मवेशियों को संरक्षित किया जा रहा है लेकिन ज्यादातर गोशालाओं में सुविधाएं के दृष्टिगत क्षमता से अधिक मवेशी भरे हुए हैं। वहां उनके स्वास्थ्य, खानपान और रहन-सहन की सुविधा की व्यवस्था का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मार्कंडेय ने बताया कि लखनऊ और अन्य पड़ोसी जिलों के छुट्टा मवेशियों को लाकर जिले में छोड़ दिया जाता है जबकि जिले में जितनी भी गोशालाएं हैं, उनमें क्षमता से अधिक मवेशी संरक्षित किए जा रहे हैं।