बाराबंकी। एक ओर सरकार आयुर्वेद को बढ़ावा दे रही है और आयुर्वेदिक फार्मेसी की पढ़ाई के लिए निजी कॉलेजों को भी सीटें आवंटित कर रखी है। मगर पढ़ाई पूरी कर चुके छात्रों को डिग्री पाने के लिए जो इंटर्नशिप करनी होती है, वह अधर में लटकी है। एक कॉलेज ने आयुर्वेदिक अस्पताल के नाम पत्र लिखा, मगर चिकित्सालय ने साफ मना कर दिया है। छात्रों से निदेशालय जाने की बात कही जा रही है।
जिले के चार कॉलेजों में डिप्लोमा इन आयुर्वेद फार्मेसी की सीटें आवंटित है। जिसके तहत दो साल की पढ़ाई का प्रावधान है। पढ़ाई पूरी होने के बाद इंटर्नशिप की आवश्यकता होती है। इसके बाद ही छात्र को डिग्री मिलती है। इसी डिग्री के सहारे छात्र दवा की दुकान खोल सकता है या फिर कहीं नौकरी के लिए आवेदन कर सकता है। जिले के सभी कॉलेजों में पढ़ाई पूरी हो चुकी है और अब इंटर्नशिप की बारी आ गई है। लेकिन इंटर्नशिप कैसे होगी, यह बताने वाला कोई नहीं है।
कोटवा सड़क के गाजीपुर स्थित श्री रामार्पित महाविद्यालय की 50 सीटों पर पढ़ाई पूरी होने के बाद जब छात्रों ने इंटर्नशिप की बात कही तो कालेज प्रशासन ने जिले के ही राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैदरगढ़ के नाम चिट्ठी लिख दी। लेकिन अस्पताल ने साफ मना करते हुए क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी का अनुमोदन लाने की बात कही। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. सुशील चौधरी का कहना है कि इसकी अनुमति निदेशालय से मिलेगी।
इंटर्नशिप के लिए निदेशालय में कहां जाएं, किससे मिले, क्या प्रक्रिया है, यह बताने वाला कोई नहीं है। पढ़ाई पूरी कर चुके बनीकोडर ब्लाक के जरौली निवासी छात्र शुभशंकर बताते हैं कि कॉलेज द्वारा राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैदरगढ़ के नाम बनाया गया पत्र बेकार साबित हुआ। सिद्धौर ब्लाक के ग्राम पूरे चंद्रमन निवासी छात्र आनंद बाबू का कहना है कि हम लोग इंटर्नशिप के लिए भटक रहे हैं।