बाराबंकी। पराली जलाने की घटनाओं पर रोकने के लिए पंचायतों को फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्र खरीदने थे। इसको लेकर कृषि विभाग ने एक महीने पहले पंचायतों के खाते में चार-चार लाख रुपये की राशि भी भेज दी। मगर, ग्राम प्रधानों ने खाते में राशि पहुुंचने के बाद भी कृषि यंत्रों की खरीद नहीं की।
धान की फसल कटाई के बाद बचे फसल अवशेष (पराली) को किसान खेतों में जला देते हैं। जिससे पर्यावरण के साथ खेतों की उर्वरा शक्ति को नुकसान पहुंचता है। इस पर रोक लगाने को लेकर शासन-प्रशासन काफी गंभीर है। पराली जलाने वालों पर जुर्माना व केस तक दर्ज कराने के बाद भी घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है।
इसको लेकर सरकार ने पंचायतों को फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्र मुहैय्या कराने की योजना बनाई। इसके तहत पंचायतों को पांच लाख के यंत्रों की खरीद करनी थी। जिसमें एक लाख रुपये ग्राम पंचायत व चार लाख रुपये कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराना था। इसको लेकर पंचायती राज विभाग ने डीएम के अनुमोदन के बाद आठ पंचायतों का चयन कर कृषि विभाग को उनका ब्योरा भेज दिया।
एक माह पहले कृषि विभाग ने दरियाबाद ब्लॉक की सरांय शाह आलम व उफरौली, मसौली ब्लॉक के गोडारी व बेरी, सिद्धौर ब्लॉक की चांदूपुर, त्रिवेदीगंज ब्लॉक की कान्हीपुर, बंकी के मनेरा तथा हरख ब्लॉक के पंडरी पंचायतों के खाते में एक-एक लाख रुपये की राशि भी भेज दी।
मगर, अभी तक पंचायतों ने फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्र की खरीद नहीं की। ऐसे में फसल अवशेष को खेतों में नष्ट कर उसे खाद के रूप में प्रयोग करने की मंशा तो दूर पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा। इस वर्ष भी जिले में पराली जलाने की 25 घटनाएं सामने आईं हैं।
पंचायतों के खाते में फसल अवशेष प्रबंधन के यंत्र खरीदने के लिए एक माह पहले ही चार-चार लाख रुपये की राशि भेज दी गई थी। यंत्र न खरीदने की जानकारी नहीं है। जांच कराई जाएगी।
-अनिल कुमार सागर, उप कृषि निदेशक