बाराबंकी। कुपोषित और अति कुपोषित समेत आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत नौनिहालों की सेहत अब रिफाइंड तेल बांट कर सुधारी जा रही है। नवंबर से निर्देश होने के बाद बाल विकास पुष्टाहार विभाग की देखरेख में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को सिर्फ एक बार ही दूध और घी नसीब हो पाया है। अंतिम बार फरवरी माह में इसका वितरण किया गया था। वहीं प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए दी जाने वाली दाल का वितरण भी कई केंद्रों पर नहीं हो सका है।
प्रदेश सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों की सेहत में सुधार लाने के उद्देश्य से घी, दूध, दाल, चावल और गेहूं बांटने के निर्देश पिछले साल दीपावली से जारी हुए थे। इसमें पहली बार जिले में जनवरी में आया घी और दूध को फरवरी माह में बांटा गया था। इसका लाभ 3 लाख 21 हजार 896 लाभार्थियों में से कुछ को ही हुआ था।
इसके बाद से विभाग को नेफैड द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे रिफाइंड तेल का वितरण केंद्रों के लाभार्थियों को किया जा रहा है और इससे नौनिहालों की सेहत सुधारने का दावा किया जा रहा है। यहीं नहीं इन लाभार्थियों को चावल और गेहूं भी हर माह नहीं मिला है। जबकि कागजों पर शत-प्रतिशत वितरण दिखाने का दावा किया जा रहा है।
400 आंगनबाड़ी केंद्रों पर नहीं बंटी दाल
स्वयं सहायता समूहों को बाहर से दाल खरीद कर उसे आंगनबाड़ी केंद्रों पर पैकेट के रुप में लाभार्थियों को बांटना था लेकिन जिले के करीब चार सौ केंद्रों के बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल सका है। सूत्रों के अनुसार, समूहों के पास राशि के अभाव में बाजार से दाल की खरीद नहीं हो सकी है। शुरू में जरूर प्रगति दिखी लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्था चरमरा गई।
पुष्टाहार विभाग के आंकड़े एक नजर में
आंगनबाड़ी केंद्र--3052
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता--2754
सहायिका--2393
तीन वर्ष तक के बच्चे--1,71,896
3 से 6 वर्ष तक के बच्चे--70,586
गर्भवती व धात्री महिलाएं--69,083
स्कूल न जाने वाली किशोरियां--2218
अतिकुपोषित बच्चे--8113
कुल लाभार्थियों की संख्या--3,21,896
शासन से नामित संस्था द्वारा सिर्फ एक बार ही घी और दूध उपलब्ध कराया गया था। जिसका वितरण लाभार्थियों को किया गया। शासन से बदलाव के बाद रिफाइंड तेल वितरित किया जा रहा है। दाल वितरण की जिम्मेदारी समूहों के पास है। जबकि चावल और गेहूं का वितरण कर्मचारियों की मौजूदगी में हर माह होता है।
-प्रकाश कुमार, डीपीओ