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92 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपना भवन नहीं

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बाराबंकी। सरकार की योजना आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करने की है ताकि निजी स्कूलों के प्लेग्रुप मॉड्यूल की बराबरी की जा सके। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है लेकिन जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती है।
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92 केंद्र ऐेसे हैं जिनके पास स्वयं का भवन नहीं है, उन्हें पंचायत भवन, परिषदीय स्कूल या अन्य किसी सरकारी भवन में संचालित किया जा रहा है। यहां तक कि सीडीपीओ समेत कई पदों पर तैनाती भी नहीं है।
जिले में तीन हजार 52 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनमें से 92 केंद्र ऐसे हैं जो कई सालों से परिषदीय स्कूलों, पंचायत भवनों समेत कई अन्य सरकारी भवनों में चल रहे हैं। इनके जरिये करीब तीन लाख से अधिक नौनिहालों, गर्भवती, धात्री माताओं व आउटड्रॉप किशोरियों को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
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इन केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, सुपरवाइजर और बाल विकास परियोजना अधिकारियों की है लेकिन आज भी जहां सीडीपीओ के नौ पद रिक्त हैं तो वहीं सात सौ से अधिक पद कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के खाली है। इसके बावजूद विभाग का दावा है कि विभागीय योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पंजीकृत लाभार्थियों तक पहुंचाया जा रहा है। अब ऐसे में केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में चलाने का सपना कैसे पूरा होगा, इस पर सवाल उठ रहा है।
दो दिन पूर्व डीएम के निर्देश पर डीपीओ प्रकाश कुमार समेत कई सीडीपीओ ने करीब 400 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया था। जहां कई केंद्र बंद पाए गए थे, वहीं कई केंद्रों पर कार्यकर्ता और अन्य कर्मचारी बिना सूचना के नदारद मिले। इस पर कार्यकर्ता और अन्य कर्मचारियों के मानदेय में कटौती भी की गई है।
सीडीओ एकता सिंह ने बताया कि इस साल कई आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण हुआ है। विभाग द्वारा और भवनों के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा ताकि स्कूलों व पंचायत भवनों में चलने वाले केंद्रों को अपने भवन मिल सकें।
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