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प्रसूताओं को स्तनपान कराने को किया गया जागरुक

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प्रसूताओं को स्तनपान कराने
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को किया गया जागरुक

क्रासर

- जिला महिला अस्पताल व सीएचसी पर हुए कार्यक्रम

फोटो-25
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक वर्ष 1 से 7 अगस्त विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। शिशु के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए स्तनपान जरूरी है। जिला महिला अस्पताल व सीएचसी में महिला डॉक्टरों, आशा बहुओं व एएनएम द्वारा महिलाओं को जागरूक किया गया।
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विश्व स्तनपान सप्ताह के पहले दिन जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी व पीएचसी में इलाज के दौरान आई महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरुक किया गया। हैदरगढ़ सीएचसी में जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक सुरेंद्र कुमार ने महिलाओं को स्तनपान से जच्चा बच्चा को होने वाले लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जिला महिला अस्पताल पहुंचे जिला प्रोग्राम अधिकारी अमरीश द्विवेदी ने वार्ड में भर्ती सरोज कुमारी, रेनू, किरन आदि से स्तनपान कराने के बारे में पूछा। कई प्रसूताओं ने दूध न आने की बात कही तो डीपीएम ने कर्मचारियों से बच्चे को मां के आंचल से एक घंटे चिपकाने को कहा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य के अंतर्गत जन्म के एक घंटे के अंदर मात्र 34.3 प्रतिशत शिशु ही मां के गाढ़ा पीला दूध का सेवन कर पाते हैं। और मात्र 60.9 प्रतिशत बच्चे ही जन्म से 6 माह तक केवल मां का दूध पीते हैं। जबकि बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पीला एवं गाढ़ा दूध जन्म से 6 महीने तक केवल मां का दूध बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी होता है। गर्भावस्था के दौरान माँ का संतुलित पोषण बच्चे के मानसिक विकास में सहयोगी होता है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान बेहतर पोषण के फलस्वरूप मां के दूध में वृद्धि भी होती है। बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। 6 माह तक सिर्फ मां का दूध व 2 साल तक स्तनपान बच्चे को दस्त, बुख़ार एवं अन्य बीमारियों से बचाता है।
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