घाघरा का जलस्तर लगातार खतरे के निशान के ऊपर बह रहा है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हो रही बारिश से पहाड़ी नालों के जरिए घाघरा में आने वाले पानी से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। एल्गिन चरसड़ी बांध पर घाघरा का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। घाघरा का जलस्तर देख तराई वासी सकते मे हैं। दो स्थानों पर घाघरा रिंग तटबंध को किसी भी समय धराशायी कर सकती है। ऐसे मे ग्रामीण अपने घरों की गृहस्थी सहेजने में जुटे हुए हैं।
तटबंध पर सबसे ज्यादा खतरा नकहरा गांव के सामने रिंग बांध पर है यहां नदी तेजी से कटान कर बांध को काट रही है। बाढ़ खण्ड के कटान रोकने के सारे प्रयास धरे के धरे रहे गये। एल्गिन चरसड़ी बांध के साथ अस्थाई रूप से बनाए गए रिंग बांध से घाघरा का पानी तेजी से काटने मे लगा है जिससे बाढ़ का खतरा क्षेत्र के लिए बढ़ने लगा है। वहीं डीएम उदयभानु त्रिपाठी ने बुधवार को बाढ़ ग्रस्त इलाके का दौराकर पीड़ितों का हाल जाना।
बुधवार को एल्गिन ब्रिज पर घाघरा खतरे के निशान 106.07 को पार करते हुए डेंजर जोन पर 106.076 पर पहुंच चुकी है। नदी के इस रूख से एक बार फिर कटान की जद में बसे नकहरा, काशीपुर, बेहटा, चरपुरवा, परसावल, नैपुरा, बांसगांव गांव पर खतरा मंडराने लगा है। ग्राम नकहरा निवासी शिवकुमार के गन्ने खेत का करीब 35 मीटर हिस्सा कटकर नदी में मिल गया है। बाढ़ खण्ड द्वारा बनाए गए अस्थाई बांध को नदी काट रही है।
दूसरी ओर चरपुरवा के करीब एक दर्जन घर नदी की कटान के मुहाने पर हैं। जिनको एक एक कर नदी काटती जा रही है। जिससे अब चरपुरवा का अस्तित्व समाप्त हो सकता है। घाघरा में बाढ़ का आलम यह है कि बेहटा से लेकर नैपुरा तक घाघरा नदी लगातार बांध से टकराने लगी है और कट वन एवं कट टू की जगह बाढ़ का पानी तेजी से बांध में कटान करने लगा है। बाढ़ के चलते कोठरी गौरिया मार्ग की पुलिया जगह जगह बैठ गई जिससे ग्रामीणों का गांवों में आवागमन प्रभावित हो गया है। वहीं कई गांवों में ग्रामीण अब नाव बनाने में जुट गए हैं।