बांदा। पुरानी पेंशन बहाली के मुख्य मुद्दे समेत अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी और शिक्षकों की लखनऊ में 30 नवंबर को हो रही रैली को प्रभावी बनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। शिक्षक संगठनों ने सरकार को खबरदार किया है कि लखनऊ महारैली के बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो उनके संगठन राजनीतिक निर्णय भी ले सकते हैं।
शुक्रवार को सोसायटी भवन में उत्तर प्रदेशीय माध्यमिक शिक्षक संघ बांदा इकाई की बैठक में जिलाध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि सांसद और विधायक पुरानी पेंशन के हकदार हैं, लेकिन 62 वर्ष की उम्र तक सेवा करने वाले शिक्षक व कर्मियों का हक छीन लिया गया। शिक्षामित्रों और 60 हजार में अनुदेशकों का शोषण किया जा रहा है।
रसोइया भी इसमें शामिल हैं। शिक्षक कैशलेस चिकित्सा से वंचित हैं। संविलयन और एनजीओ छटनी के द्वारा सरकार निजीकरण लाकर नौकरी से दूर कर रही है। प्रमोशन और ट्रांसफर सालों से ठप हैं। अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षक और कर्मी ने समय को न पहचाना तो पछतावा होगा। सरकार को यह भी चेतावनी दी कि लखनऊ रैली के बाद मांगें पूरी नहीं हुईं तो संगठन राजनीतिक निर्णय भी ले सकता है।
महारैली के लिए प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्मा के निर्देशों का हवाला देकर जिम्मेदारियां सौंपी गईं। कहा कि बांदा से प्राथमिक शिक्षक संघ 15 बसें लखनऊ ले जाएगा। अन्य संगठन अलग वाहनों की व्यवस्था कर रहे हैं। बताया कि यह आंदोलन कर्मचारी, शिक्षक, अधिकारी व पेंशनर्स अधिकार मंच के बैनर तले किया जा रहा है।
बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रजीत सिंह, संयुक्त मंत्री जयकिशोर दीक्षित सहित केपी सिंह, राजेश तिवारी, राजवीर सिंह, छोटेबाबू प्रजापति, भुवनेंद्र यादव, राजेश द्विवेदी, आशुतोष गौतम, राजेश यादव, विनय प्रताप सिंह, सुनील वर्मा, चंद्रशेखर त्रिपाठी, संतोष सविता, इंद्रजीत निषाद, विवेक यादव, अंजना तिवारी, शशांक शेखर आदि शामिल रहे।