बांदा। शासन की तमाम कवायदों के बावजूद स्टांप पर अवैध वसूली नहीं रुक रही। चित्रकूटधाम मंडल में ई-स्टांप वेंडर निर्धारित कीमत से ज्यादा पैसा वसूल रहे हैं। इससे लोग परेशान हैं, जबकि शासन द्वारा उन्हें स्टांप की बिक्री पर आधा फीसदी कमीशन दिया जाता है।
इससे लोगों को प्रतिदिन लाखों रुपये का चूना लग रहा है। आईजी स्टांप कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, चित्रकूटधाम मंडल के चारों जनपदों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में प्रतिदिन बैनामा, इकरारनामा, वसीयत, शपथपत्र सहित अन्य कार्यों में करीब दो करोड़ रुपये कीमत के स्टांपों की खपत है। हाल ही में फर्जी स्टांप और राजस्व चोरी रोकने के लिए सरकार ने मैनुअल स्टांप व्यवस्था को खत्म कर ई-स्टांप सेवा शुरू की थी। इसकी जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनी स्टाक होर्डिंग कारपोरेशन लिमिटेड (मुंबई) को सौंपी गई है।
इनके द्वारा जिला प्रशासन की संस्तुति पर अब तक मंडल के 132 स्टांप वेंडरों को ई-स्टांप बिक्री के लाइसेंस जारी किए गए हैं। सरकार द्वारा ई-स्टांप वेंडरों को स्टांप बिक्री पर आधा फीसदी कमीशन दिया जाता है। उधर, ई-स्टांप वेंडर अवैधानिक रूप से स्टांप लागत से एक से दो फीसदी पैसा लोगों से ज्यादा लिया जा रहा है। सदर रजिस्ट्रार कार्यालय में बैनामा कराने आए रामभवन का कहना है कि सरकार ने ई-स्टांप व्यवस्था लोगों को सहूलियत देने के लिए शुरू की थी, लेकिन यहां पर ई-स्टांप विक्रेता लोगों को लूट रहे हैं।
मंडल में ई-स्टांप विक्रेता और प्रतिदिन स्टांप खपत (रुपये में)---
जनपद लाइसेंसी खपत
बांदा 35 50 लाख
चित्रकूट 27 45 लाख
महोबा 22 40 लाख
हमीरपुर 17 35 लाख
योग 101 170 लाख
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ई-स्टांप वेंडरों को मिलता आधा फीसदी कमीशन
स्टॉक होर्डिंग कारपोरेशन लिमिटेड के बांदा-चित्रकूट प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि स्टांप बिक्री में सरकार से वेंडर का कमीशन निर्धारित है। मैनुअल स्टांप व्यवस्था में सरकार वेंडरों को लागत पर एक फीसदी कमीशन देती थी, लेकिन ई-स्टांप व्यवस्था शुरू होने के बाद सरकार ने वेंडरों के कमीशन को आधा फीसदी कर दिया। किसी भी ग्राहक से वेंडर लागत से अधिक पैसा नहीं ले सकते हैं। हालांकि, कार्रवाई का अधिकार जिला प्रशासन के पास है। एडीएम ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर लाइसेंस निरस्त करा सकते हैं।
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जल्द बुलाएंगे स्टांप विक्रेताओं की बैठक
अपर जिलाधिकारी संतोष बहादुर सिंह का कहना है कि स्टांपों की बिक्री शासन द्वारा निर्धारित शुल्क में ही की जाएगी। अधिक पैसा लेने की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। जल्द इस संबंध में स्टांप विक्रेताओं की बैठक बुलाकर शासन के नियमों से अवगत कराया जाएगा। सुधार न होने पर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के साथ स्टाक होर्डिंग कारपोरेशन को लाइसेंस निरस्त करने को पत्र भेजा जाएगा।