Two more racks of DAP and urea fertilizers came
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बांदा। खाद के लिए किसानों के हायतौबा के बीच दो रैक डीएपी व यूरिया यहां आ गई। डीएपी की एक रैक दो दिन में मुख्यालय आने की संभावना है। कृषि विभाग का दावा है कि जिले में खाद की कमी नहीं है। इसके बावजूद किसान खाद के लिए परेशान हैं।
जनपद में इस वर्ष करीब साढ़े तीन लाख हेक्टेअर में रबी फसल बुवाई का लक्ष्य है। किसानों को फसलों की बुवाई आदि में खाद की जरूरत होती है। किसानों को एक बोरी खाद लेने के लिए चार-चार दिन लग रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी केंद्रों में खाद नहीं मिल पा रही। मजबूरन प्राइवेट दुकानों में अधिक पैसा खर्च कर खाद खरीदना पड़ रही है। वह भी गुणवत्ता में सही नहीं निकलती।
ऐसे में किसान सरकारी खाद पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी डा.प्रमोद कुमार का कहना है कि जनपद में 4128 मीट्रिक टन (एमटी) यूरिया और 3886 एमटी डीएपी खाद की उपलब्धता होनी चाहिए। जनपद में 5190 एमटी यूरिया और 6342 एमटी डीएपी खाद उपलब्ध है। पिछले साल अक्तूबर में विभाग के पास जिले में 6755 एमटी यूरिया व 10,284 एमटी डीएपी उपलब्ध थी।
उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर दो दिन पहले पाराद्वीप से 27 हजार एमटी डीएपी की रैक मुख्यालय आई थी। बांदा को 1500 एमटी डीएपी मिली थी। शेष खाद चित्रकूट भेज दी गई। गुरुवार को 2634 एमटी यूरिया की एक और रैक मुख्यालय आ गई है। इसमें बांदा को 1580 एमटी व करीब एक हजार चित्रकूट की है। सहकारी समितियों में यूरिया भेजी जा रही है। उधर, 42 वैगन डीएपी की एक रैक कांडला (गुजरात) से निकल चुकी है। दो दिन में मुख्यालय आने की उम्मीद है।
3504 एमटी यूरिया उपलब्ध
बांदा। कृषि विभाग के अनुसार सहकारी समितियों मे 3504.715 एमटी यूरिया की उपलब्धता है। जिसमें 1029.965 एमटी वितरण किया गया है। 2474.730 एमटी शेष है। 5907.36 एमटी डीएपी खाद उपलब्ध है। 4790.110 एमटी वितरण किया जा चुका है। 1117.250 एमटी अवशेष है।