किसानों को सुझाव देते कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र सिंह।
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बांदा। बुंदेलखंड में पानी के विकट संकट से खेती में पैदा हो रही बाधा और गिरावट पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र सिंह ने वर्षा आधारित खेती प्रबंधन के लिए तैयार किए गए मॉडल पर खेती करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि बरसात नजदीक है। इसके पानी को खेत में ही संचित करने की अभी ही तैयारी जरूरी है। उन्होंने जायद में मूंग की खेती के लिए किसानों को प्रेरित किया है।
डॉ. जितेंद्र ने यहां कृषि विज्ञान केंद्र में वैज्ञानिक (सदस्य) पद पर कार्यभार ग्रहण किया है। इसके पूर्व में 2008 से 2011 तक यहां रह चुके हैं। रविवार को डॉ. सिंह ने गुरेह, मथनाखेड़ा और अरबई आदि गांवों का भ्रमण किया। खेतों में जाकर फसलों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में उन्होंने वर्षा आधारित खेती प्रबंधन का मॉडल तैयार किया था। उन्होंने खेतों में किसानों को बताया कि बारिश की एक-एक बूंद संरक्षित करने के लिए इसी माह मई में तैयारी पूरी करनी होगी।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में खेत में जल और नमी का संरक्षण कर लिया जाए तो उपयुक्त प्रजापति के बीज बोकर सफल फसल ली जा सकती है। जल संरक्षण प्रबंधन में सबसे पहले कटाई के समय ट्रैक्टर या बैलगाड़ी निकालने के लिए मेड़ काट दी जाती हैं। इन्हें बारिश से पहले मजबूती से बांध दें। पहली बारिश के बाद हर खेत में फावड़ा लेकर मेड़ मजबूत करें। इससे खेत में पानी संरक्षित हो जाएगा। उन्होंने सलाह दी कि वर्षा के बीच गहरी जुताई भी करते रहे। बारिश होने वाली हो तो हल्की जुताई करके खेत खुला छोड़ दें।