Three and a half percent wheat procurement in 39 days
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बांदा। सरकारी सहूलियतों और 72 घंटे के अंदर भुगतान होने के दावे के बावजूद इस बार किसान सरकारी खरीद केंद्रों में गेहूं बेचने का रुख नहीं कर रहे हैं। इसकी मुख्य वजह बाजार में समर्थन मूल्य से ज्यादा कीमत पर गेहूं खरीदा जाना है। नतीजे में सरकारी केंद्र सन्नाटे में हैं। इक्का-दुक्का किसान ही केंद्रों में गेहूं बेचने पहुंच रहे हैं। अब तक जनपद के 67 खरीद केंद्रों में लक्ष्य का मात्र साढ़े तीन फीसदी ही गेहूं खरीद हो सकी है।
पहली अप्रैल से जनपद में शुरू हुई खरीद बहुत ही धीमी गति से चल रही है। जनपद में एक माह नौ दिन में 2597.25 मीट्रिक टन खरीद हो सकी है। यह लक्ष्य का साढ़े तीन फीसदी है। लक्ष्य 72000 मीट्रिक टन खरीद का है। अब तक 692 किसानों ने गेहूं बेचा है। मंडी समिति स्थित विपणन शाखा में 453.50 क्विंटल की खरीद हो सकी है। यहां 12 किसानों ने गेहूं बेचा है। इसी तरह एफसीआई केंद्र में 10 किसानों ने 295.05 क्विंटल गेहूं बेचा है। यूपीएसएस शाखा में 1049.50 क्विंटल की खरीद की गई है। यहां 29 किसानों ने गेहूं बेचा है। उधर, बाजार में गेहूं खरीद का रेट 2000, 2010 व 1975 रुपये प्रति क्विंटल होने पर ज्यादातर किसान बाजार का रुख कर रहा है।
जिला खाद्य विपणन अधिकारी सीपी पांडेय ने बताया कि खरीद केंद्रों में किसानों को सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। फिलहाल खरीद की गति धीमी है। प्रयास किया जा रहा है कि खरीद का लक्ष्य पूरा हो। इसके लिए शासन के निर्देश पर सचल खरीद भी शुरू की गई है।