बांदा। सृष्टि की शुरूआत के दिन माने जाने वाले महाशिवरात्रि पर शिवभक्तों की श्रद्धा सिर चढ़कर बोली। शहर के पश्चिम छोर पर स्थित बांबेश्वर पहाड़ के शिव मंदिर पर तड़के से ही शिवमंत्र और हर-हर महादेव के गूंजते नारों के बीच महिला-पुरुषों की लंबी कतार लग गई।
चट्टानों के बीच गुफा में स्थित शिवलिंग पर जल और दुग्धाभिषेक तथा पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं को काफी मशक्कत करना पड़ी। महिलाओं की संख्या ज्यादा रही। पुलिस और स्वयंसेवी संगठनों ने मंदिर से लेकर आसपास और रास्तों पर विशेष व्यवस्थाएं कीं।
तड़के करीब तीन बजे से ही मंदिर से शिव गीत बज उठे। पहाड़ पर मंदिर स्थित होने से शिव मंत्र, गीत लगभग पूरे शहर में सुनाई दिए। महिलाएं पूजा सामग्री लेकर दूर-दूर से नंगे पांव पर्वत पर आईं। शिवभक्तों ने शिवलिंग पर जल और दुग्ध के साथ ही चंदन का लेपकर बेलपत्र, फूल और धतूरा आदि चढ़ाया।
मंदिर के मुख्य द्वार पर महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेश की व्यवस्था थी। सुरक्षा के मद्देनजर सीसीटीवी कैमरे अबकी भी लगे रहे। महिलाओं को महिला पुलिस कर्मी और मंदिर समिति के कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा और सुविधा दी।
पुरुषों को भी स्वयंसेवकों ने अनुशासनबद्ध ढंग से बारी-बारी से गुफा में प्रवेश दिया। मंदिर आयोजन समिति से जुड़े प्रबंधक नरेंद्र सिंह नन्ना, अध्यक्ष आशुतोष दीक्षित (वीर) सहित विधु त्रिपाठी, शशि शेखर श्रीवास्तव, अशोक ओमर, डा.नवल किशोर त्रिपाठी, कमलेश दुबे, आनंद वाजपेयी आदि उपस्थित रहे।
नीलकंठेश्वर में एमपी के भक्तों ने भी टेका माथा
नरैनी। विश्व विख्यात दुर्ग में स्थित नीलकंठेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि पर भारी संख्या में शिवभक्तों ने माथा टेका। इनमें सीमावर्ती मध्य प्रदेश के भी श्रद्धालु थे। चंदेल शासकों के कार्यकाल में निर्मित मंडप तले स्थित प्राचीन शिव मूर्ति पर दूध और जलाभिषेक कर पूजन सामग्री के साथ पूजा की गई। जनपद न्यायाधीश गजेंद्र कुमार और जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने भी यहां पर पूजा-अर्चना की। (संवाद)
चट्टानों के बीच गुफा से मंदिर में प्रवेश करतीं महिलाएं। - फोटो : BANDA
रंगोली में भगवान शंकर की आकृति सजातीं निशा गुप्ता। - फोटो : BANDA