बांदा। कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित 21 दिवसीय प्रशिक्षण में बुधवार को मलेशिया और देहरादून के वैज्ञानिकों ने वर्चुअल अपने अनुभव साझा किए। वन संसाधनों के व्यवसायिक महत्व और वैश्विक बाजार में प्लाईवुड की बढ़ती मांग के मद्देनजर वन संपदा बचाने की भी चुनौती है।
वन अनुसंधान, देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक डीपी खली ने कहा कि प्लाई वुड की मांग के बीच वन संपदा बचाना भी अहम जिम्मेदारी है। इसे विशेष तकनीक से बचाया जा सकता है। पुत्रा विश्वविद्यालय, मलेशिया के प्रो.डा. मोहम्मद जावेद ने कहा कि नई शोध तकनीक अपनाकर उसे प्रकाशित करें। जिससे अन्य शोधकर्ताओं को इसका लाभ मिल सके।
उन्होंने वैज्ञानिकों को अपने शोध प्रकाशित करने के लिए प्रेरित किया। पहांग विश्वविद्यालय, गंबांग (मलेशिया) डा.अरुण गुप्ता ने कहा कि पेट्रोलियम, यूरिया व फार्मनडिहाईड आधारित एंडहेसिब को भविष्य में प्रतिस्थापन किया जा सकता है। यह पर्यावरण के अनुकूल नहीं है। प्रशिक्षण के निदेशक डा.ऐश्वर्य महेश्वरी ने सभी का आभार जताया। डा. मोहम्मद नासिर, डा. कौशल सिंह, डा.अरविंद कुमार गुप्ता व संजय कुमार, जनसंपर्क अधिकारी डा. बीके गुप्ता आदि उपस्थित रहे।